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पार गगन  

पंक्षी सा उड़ जाऊं 
पंख पसार ...(१)

मीठी वानी 
कुटिल सयानी सी 
मन की काली...(२)

है मतवाली
फिरती डाली डाली 
कोयल ये काली ...(३)

------अलका गुप्ता -----

नोट - यह मेरी स्व रचित मौलिक रचना है 

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Comment

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Comment by Alka Gupta on December 26, 2013 at 10:24pm

आर्दिक आभार आपका एवं आपके प्रेरक शब्दों का आदरणीय साथियों 

Comment by ram shiromani pathak on November 19, 2013 at 11:22pm

सुन्दर प्रयास आदरणीया हार्दिक बधाई  आपको///सादर 

Comment by annapurna bajpai on November 19, 2013 at 11:20pm

सुंदर हाइकु !! आ० अल्का जी । आ० प्राची जी के मशविरे पर ध्यान देने की आवश्यकता है । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on November 19, 2013 at 9:49pm

सुन्दर हाइकू, बधाई............


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 19, 2013 at 8:37pm

बधाई व शुभकामनाएँ..


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on November 19, 2013 at 6:51pm

सुन्दर हायकू प्रयास आ० अलका जी 

इस हायकू को पुनः देख लें 

मीठी वानी ................४ वर्ण 
कुटिल सयानी ............६ वर्ण 

मन की काली

शुभकामनाएं 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on November 19, 2013 at 5:45pm

सुंदर हायकू ..सादर बधाई 

Comment by Meena Pathak on November 19, 2013 at 5:15pm

सुन्दर हाइकू पर जैसा की आदरणीय योगराज जी ने कहा एक बार पुनः दूसरा हाइकू देख लीजिए ...


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 19, 2013 at 4:56pm

दूसरे हाइकू की पहली और दूसरी पंक्ति पुन: देखें आ० अलका गुप्ता जी.

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 19, 2013 at 3:01pm

 अलका जी

सराहनीय प्रयास है  i

शब्द चयन एवं प्रयोग दोनों ही अच्छे हैं i

कृपया ध्यान दे...

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