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***मैं बहुत हेट करती हूँ ……………***

मैं बहुत हेट करती हूँ ……………


हेट हेट हेट
हाँ
मैं बहुत हेट करती हूँ
ये लव
मुहब्बत
और
प्यार जैसे
सब लफ़्ज़ों से
मुझे हेट होती है
क्या मिलता है आखिर
इन लफ़्ज़ों को ज़िंदगी भर
अपने सीने से लगाकर
अपनी साँसों का
हमदर्द बनाकर
मिलता है तो बस
अश्कों का साथ
तन्हाई की रात
रुसवाई की सौगात
क्या यही इसका अंज़ाम है
मैंने कब चाहा था कि
मेरी पलकों को
सागर सी मुहब्बत का स्वपन मिले
मुझे तो बस
जुगनू से मासूम प्यार की
अभिलाषा थी
एक छोटा सा दिल था
एक छोटी सी आशा थी
प्रणय पंथ पर
असीमित अनुभूतियों के
एक स्पर्श की चाहत थी
क्योँ कोई शूल
स्नेह के आवरण में
अपने ही पुष्पदल को
क्षत विक्षित कर देता है
और दे देता है
उसकी महक को
एक एकांत
और
स्वप्निल आँखों के रेतीले किनारों पर
कभी न सूखने वाला
नमी का तूफ़ान
नहीं मैं ये सब सहन न कर पाऊंगी
सितारों भरी रात से
मैं तन्हा न बतिया पाऊँगी
शायद इसीलिये मैं
प्यार के आमंत्रण को
नेगलेट करती हूँ
और
इन स्वार्थी शब्दों से हेट करती हूँ ,
हेट करती हूँ ………

सुशील सरना

''मौलिक एवं अप्रकाशित ''

Views: 978

Comment

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Comment by Sushil Sarna on November 29, 2013 at 7:14pm

aa.Coontee Mukerji rachna par aapkee pratikriya ka haardik aabhaar kintu kshma sahit main aapkee is pratikriya ka arth naheen smajh paaya ?

Comment by coontee mukerji on November 29, 2013 at 4:44pm

बहुत सुंदर जैसे देहाती के हाथ (पित्ज़ा-बर्गर)

Comment by Sushil Sarna on November 28, 2013 at 9:05pm

aapkee baat se main sahmat hoon Sandeep Kumar Patel jee lekin ye maatr aik pryog tha ....aapke is sneh ka haardik aabhaar..sneh bnaaye rakhain

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on November 28, 2013 at 8:07pm

आदरणीय ऐसा नहीं लगता है के ये इंग्लिश के शब्द जबरन ठूंस दिए गए हों

जबकि वहाँ हिंदी के शब्द और भी गहरा प्रभाव छोड़ सकते थे

वैसे सृजन के लिए आपको बधाई हो

Comment by Sushil Sarna on November 27, 2013 at 7:23pm

Savitri Rathore jee rachna par aapkee madhur pratikriya ka haardik aabhaar

Comment by Savitri Rathore on November 27, 2013 at 7:08pm

एक सुन्दर रचना के सृजन हेतु आपको बधाई हो।

Comment by Sushil Sarna on November 27, 2013 at 6:24pm

Vijay Mishar jee rachna par aapkee aatmeey prashansa ka haardik aabhaar

Comment by विजय मिश्र on November 27, 2013 at 5:14pm
शव्दों की बाजीगरी लाजवाब है , शुष्क भी ,तरल भी और मृदुल भी . बधाई सुशीलजी .
Comment by Sushil Sarna on November 26, 2013 at 8:46pm

aapke neh ka shukriya Brijesh jee

Comment by बृजेश नीरज on November 26, 2013 at 8:30pm

आदरणीय सुशील जी मेरे कहे को मान देने के लिए आपका हार्दिक आभार!

कृपया ध्यान दे...

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