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मौन हवाएं

सर्द गर्म और सीली सीली

आते जाते

आम जनों की

तबियत ढीली  

सन्नाटों की चीख

अनवरत अनुशासित है

लेन देन की बात करे हैं

सारे उल्लू

चन्दा का उजियारा

ढूँढे

जल भर चुल्लू

भूतों और पिशाचों से

बस ये शासित है

दहशत वहशत

खुली सड़क पर

खुल के झूमें

डाकू और लुटेरे

क्षण क्षण

दामन चूमें

शबनम का कतरा

त्रण त्रण में आभासित है

अन्धकार को आज करूँ

लो परिभाषित मैं

 

संदीप पटेल “दीप”

मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment

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Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 14, 2013 at 1:45pm

आदरणीय सौरभ सर .........ये रचना तो बस लिख गयी ...............पता नहीं चलता कभी कभी के क्या होना चाहिए क्या नहीं

मैंने अनुशासित है लिया है तो शासित ही होना चाहिए ...................पता नहीं सर जी ........कुछ गड़बड़ हुई हो तो अवश्य बताइए शायद कुछ सूझ नहीं रहा है


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 8, 2013 at 10:47am

पहले बन्द में, यदि वह बन्द हा जाये तो,  शाषित है  होगा या शाषित हैं होगा ?

इस पंक्ति में टंकण त्रुटि हो गयी है जिसे इस तरह से होना चाहिये था -- पहले बन्द में, यदि वह बन्द हो जाये तो,  शाषित है  होगा या शाषित हैं होगा ?

वस्तुतः यह पंक्ति मेरा प्रश्न है आपसे. यह जिज्ञासा है मेरी.

आपका बन्द है -

लेन देन की बात करे हैं

सारे उल्लू

चन्दा का उजियारा

ढूँढे

जल भर चुल्लू

भूतों और पिशाचों से

बस ये शासित है

यहाँ शासित है  के प्रति मेरी जिज्ञासा बनी है.

धन्यवाद, भाईजी.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 8, 2013 at 9:41am

आप सभी स्नेही मित्रों और अग्रजों का ह्रदय से धन्यवाद स्नेह यूँ ही बनाये रखिये सादर

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 8, 2013 at 9:40am

//पहले बन्द में, यदि वह बन्द हा जाये तो,  शाषित है  होगा या शषित हैं होगा ?/aआदरणीय सौरभ सर जी सादर प्रणाम

मैं आपके कहे को समझ नहीं सका

कृपया मार्गदर्शन करें

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 8, 2013 at 12:38am

यानि आप ये भी कर देते हैं..  :-))))

पहले बन्द में, यदि वह बन्द हा जाये तो,  शाषित है  होगा या शषित हैं होगा ?

शुभ-शुभ

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 3, 2013 at 3:42pm

पटेल जी

आप इस रचना के लिए बधाई के पात्र है i  

Comment by ram shiromani pathak on December 3, 2013 at 12:25am

आदरणीय संदीप भाई बहुत ही सुन्दर रचना  बधाई आपको.................

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 3, 2013 at 12:13am

बेहद सुंदर !  बधाई स्वीकारें आदरणीय संदीप जी

Comment by बृजेश नीरज on December 2, 2013 at 9:27pm

बहुत सुन्दर! आपको हार्दिक बधाई!

Comment by विजय मिश्र on December 2, 2013 at 5:41pm
वास्तव में , यह घोर अंधकार अन्यत्र नहीं . सटीक और स्पष्ट रचना केलिए बधाई संदीपजी

कृपया ध्यान दे...

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