For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघुकथाः कौआ (रवि प्रभाकर)

कौआ आज फिर प्यासा था। लेकिन अब उसे हर हर रोज़ कंकड़ पत्थर इकट्ठे करते हुए बहुत कष्ट होने लगा था. वह इस रोज़ रोज़ के संघर्ष से मुक्ति चाहता था। फिर एक दिन अचानक ही उसने भगवे वस्त्र धारण कर लिए, माथे पर लंबा सा तिलक लगाया एक बड़ी सी स्टेज सजा कर ‘कांव-कांव’ करने लगा। देखते ही देखते अनगिनत लोग उसके अनुयायी बन उसकी जय जयकार करने लगे । अब वह सयाना कौआ बड़े आराम से दिन भर ‘कांव-कांव’ करता, क्योंकि उसकी ‘भूख’ व ‘प्यास’ का जीवन भर के लिए जुगाड़ हो चुका था।

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 762

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 20, 2013 at 12:49pm

यथार्थ गहन अर्थप्रधान लघुकथा 

हार्दिक बधाई आ० रवि प्रभाकर जी 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 20, 2013 at 3:45am

वाह वाह वाह .. अनुज रविजी.. ! क्या सटीक निशाना लगाया है आपने !
इस अत्यंत सफल लघुकथा पर हृदय से बधाई स्वीकारें. मन झूम गया है. बहुत खूब !

वैसे, वो कौआ तनिक जल्दिया गया. अगर वो भगवा ओढ़ने और मंच सजाने की जगह इस दिसम्बर मास की सुबह-सुबह कैरोल्स गाता रहता और देर शाम गये सुसज्ज मंच से माइक पर दिव्य-दृष्टि दे पाने का सुप्रचार किया करता, तो शायद उसकी भूख-प्यास की ही नहीं उसकी पीढियों के जीने की व्यवस्था होजाती. .. हा हा हा..
ऐसों का तो पूरा कॉर्पोरेट काम करता है ! उस लिहाज से भगवाधारी कौए बेचारे बहुत पिछड़े हैं ! ..   :-))))
शुभ-शुभ

Comment by annapurna bajpai on December 19, 2013 at 12:54pm

वाह !! आ0 रवि प्रभाकर जी बड़ी सुघडता से आपने प्रस्तुत की है कौवे की कांव कांव । बधाई इस लघु कथा के लिए । 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 19, 2013 at 8:41am

वाह ! इन्सान की नादानी पर कौवे की बुद्धिमानी भारी पड़ गई, बहुत बढ़िया लघुकथा आदरणीय रवि जी, हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by vandana on December 19, 2013 at 6:44am

बहुत खूब आदरणीय रवि सर बेहतरीन लघुकथा 

Comment by AVINASH S BAGDE on December 18, 2013 at 11:32pm

वाह! क्या खूब लिखा है, कौवे की बुद्धिमानी ..आज  ka कौआ !!!

Comment by Priyanka singh on December 18, 2013 at 10:19pm

आज का सच ......कम में ज्यादा कह दिया आपने..... बधाई सर 

Comment by Sanjay Mishra 'Habib' on December 18, 2013 at 6:12pm

क्या खूब.... वाह!!!

आदरणीय रवि भाई जी सादर बधाई स्वीकारें...

Comment by Shyam Narain Verma on December 18, 2013 at 10:07am
सुन्दर लघुकथा हेतु बधाई.............

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 18, 2013 at 8:32am

आदरणीय रवि भाई , ढ़ोंगी साधुओं की अच्छी खिचाई की आपने , सुन्दर लघु कथा के लिये बधाई ।

वैचारिक रूप से केवल भगवा रंग के ढोंगियों पर निशाना बांधने के खिलाफ हूँ , जब ये  हर वर्ग , हर रंग के कपड़े पहनने वाले ढोंगी कर रहे हों । जरा सोच के देखियेगा ॥ शायद मै सही लगूँ ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"चमत्कार की आत्मकथा (लघुकथा): एक प्रतिष्ठित बड़े विद्यालय से शन्नो ने इस्तीफा दे दिया था। कुछ…"
10 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
18 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
18 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"बहुत आभार आदरणीय ऋचा जी। "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"नमस्कार भाई लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है।  आग मन में बहुत लिए हों सभी दीप इससे  कोई जला…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"हो गयी है  सुलह सभी से मगरद्वेष मन का अभी मिटा तो नहीं।।अच्छे शेर और अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आ.…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"रात मुझ पर नशा सा तारी था .....कहने से गेयता और शेरियत बढ़ जाएगी.शेष आपके और अजय जी के संवाद से…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. ऋचा जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. तिलक राज सर "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. जयहिंद जी.हमारे यहाँ पुनर्जन्म का कांसेप्ट भी है अत: मौत मंजिल हो नहीं सकती..बूंद और…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service