For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

स्कूल के कुछ दोस्त मिलकर घर में पड़े पुराने कम्बल गरीबों में बाँटने को निकले। कम्बल बाँट कर वे ज्यों ही वापस चलने को हुए, एक बुजुर्ग ने आवाज़ लगाई ………

"बबुआ जी तनिक सुनो"

"जी बाबा, आपको तो कम्बल दे दिया न ?"

"जी बबुआ जी, कम्बल तो दिया और फिर आप लोग ऐसे ही चल दिए"
"ऐसे ही चल दिए मतलब ?"

"बबुआ जी, पिछले तीन दिन से चमचमाती गाड़ियों में साहब लोग आते हैं, कम्बल बाँट कर फ़ोटो खिचवाते हैं और फिर २०-२० रूपया देकर कम्बल वापस ……… "

(मौलिक व अप्रकाशित)

पिछला पोस्ट =>कीमत

Views: 1422

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by ram shiromani pathak on December 26, 2013 at 10:16pm

लघुकथा ऐसी जो सोचने पर विवश कर दे ////"देखन को छोटन लगे घाव करे गम्भीर" जय हो   … आदरणीय गणेश जी  हार्दिक बधाई आपको 

Comment by sandhya singh on December 26, 2013 at 12:03pm

बहुत सुन्दर लघु कथा .......अप्रत्याशित अंत ......एक सघन सोच लेखक की 

Comment by Satyanarayan Singh on December 25, 2013 at 8:21pm

आ. बागी जी सादर

       इस रंग बदलती दुनिया का आपने एक और  पहलु समाज के सामने उजागर किया है इस लघु कथा के माध्यम से हार्दिक बधाई आदरणीय.

Comment by MAHIMA SHREE on December 25, 2013 at 8:02pm

ह्म्म्म मम्म ऐसा भी होता ?? ये  मुझे पता नहीं था ... कई  ढोंग  और धोखे गरीबो के साथ होते हैं पर .. ये तो बहुत बड़ा  और घिनोना मजाक है  ... बधाई आदरणीय बागी जी .. लघु कथा के बहाने  सेवा पे  नाम पर ऐसी घटनाओं  को उद्घाटित करने के लिए .. सादर 

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 25, 2013 at 3:21pm

आदरणीय भ्राताश्री वाह बहुत ही सटीक और कडवी सच्चाई बयां की है आपने दिल खुश हो गया पढ़कर बहुत बहुत बधाई स्वीकारें.

Comment by Shubhranshu Pandey on December 25, 2013 at 3:06pm

आदरणीय गणेश भैया,

कई देसी- विदेशी तथाकथित सेवा संस्थानों के क्रियाकलाप का भेद आपने खोल दिया है. गरीबों की सेवा करने और फ़िर उस संस्थान के  एक पोस्ट के लिये चुने जाने के लिये लाखों खर्च करने वालों की हकीकत है.

सुन्दर कथा है.

सादर. 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on December 25, 2013 at 8:45am

आज के समय में यही सब हो रहा है, क्या पता भविष्य में इन्सान के और कितने रूप देखने को मिलते है, शायद २० रु भी न दें एवम  तस्वीरे भी निकल जाये ,वर्तमान के कटु सत्य को बयां करती लघुकथा हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीय गणेश जी   :-))

Comment by vandana on December 25, 2013 at 6:54am

ओह !!! कडवी सच्चाई बयां करती लघुकथा ....सटीक प्रहार ! आदरणीय गणेश जी 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on December 24, 2013 at 10:52pm

सस्ते में नाम ( और पुण्य ) कमाने की इस नई तरकीब का सफल प्रयोग सचमुच ही कुछ लोग करते होंगे और कुछ प्रारम्भ कर देंगे॥

सच्चाई के करीब इस लघु कथा की हार्दिक बधाई आदरणीय गणेश भाई॥

Comment by upasna siag on December 24, 2013 at 10:40pm

इस दिखावटी दुनिया में सब सम्भव है। 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
yesterday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service