For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुंडलिया -

सबके अन्दर जी रहा , मेरा , मै का भाव

वही डिगाता है सदा , आपस  का सदभाव

आपस  का  सदभाव , मिटाये ऐसी  दूरी

रिश्ते का सम्मान , हटा दे  हर  मजबूरी

टूटे  रिश्ते जुड़ें , सामने  कहता  रब  के  

रहे सरलता भाव, प्रज्वलित अन्दर सब के

 

मौलिक एवँ अप्रकाशित ( संशोधित )

Views: 712

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on January 21, 2014 at 10:29am

कुंडली के भाव बहुत सुन्दर हैं, बधाई स्वीकारें आ० भंडारी जी.

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 27, 2013 at 11:49pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब सादर, सुन्दर कुण्डलिया छंद रचा है. संशोधन के बाद के प्रभाव पर ध्यान न देने से रचना के भाव गड्डमड्ड हो गए हैं. “टूटे रिश्ते जुड़ें” में गेयता बाधित है. देख लें. सादर

जिस ‘मैं’ के भाव को लेकर आपने रचना की है वह यकीनन आज प्रबल है.

 

सबके अन्दर जी रहा, अब तो मैं का भाव

जितनी झाडू  फेर दो, बदले नहीं स्वभाव

बदले नहीं स्वभाव, अहम का पिंड निराला,

पाकर चिंदी आज, हुआ मूषक मतवाला,

हो मालिक या दास, रहे ना कोई दब के,

वर्तमान नव रूप, भरे अन्दर मैं सबके ||


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 27, 2013 at 10:29pm

इस संयत प्रयास के लिए हार्दिक बधाई भाईजी.

सुधीजनों ने सार्थक बातें बतायी हैं. अच्छा लग रहा है.

सादर

Comment by बृजेश नीरज on December 27, 2013 at 8:33pm

आदरणीय गिरिर्राज जी, आपका प्रयास सही दिशा में है!

दोहे का अंतिम चरण रोले का प्रथम चरण होता है लेकिन तब यह भी ध्यान रखना होता है कि रोले के दूसरे चरण से उसकी तारतम्यता बनी रहे, यहाँ थोड़ी चूक हुई लगती है जिसके कारण अर्थ उल्टा हो रहा है! रोले की तीसरी पंक्ति में भाव अस्पष्ट है!

इस प्रयास के लिए आपको हार्दिक बधाई!

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on December 27, 2013 at 1:31pm

मित्र/ अनुज
छंदकार बन जायेंगे , गज़लकार जी आप i

यह तो अद्भुत सत्य है, कोई दिव्य प्रताप ii

कोई दिव्य प्रताप,  सुरभि देता जब मन में i

उठते नव उदगार , सहज ही भाव गगन में ii

आती   है  विश्रांति , तब  लोचन  होते  बंद i

मोती सा तब सीप,  में जगमग करता छंद ii    

बहुत बहुत बधाई मित्र  i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 7:19am

आदरणीय राम भाई , आपका शुक्रिया !! सुधार के प्रयास मे हूँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 7:18am

आदरणीय नादिर खान भाई , रचना की सराहना के लिये आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 7:17am

आदरणीय रमेश भाई , प्रयास की सराहना और सही सलाह के लिये आभार । सुधार के प्रयास मे हूँ ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 7:15am

आदरणीय श्याम भाई, आपका बहुत बहुत आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 7:15am

आदरणीय बड़े भाई , कुंडलिया रचने के प्रयास मे हूँ , धीरे धीरे सीख रहा हूँ । प्रयास की सराहना के लिये आभार । आपकी सलाह भी सही है , भाव गलत हो रहा है , आवश्यक सुधार करूंगा ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service