For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कुंडलिया -

सबके अन्दर जी रहा , मेरा , मै का भाव

वही डिगाता है सदा , आपस  का सदभाव

आपस  का  सदभाव , मिटाये ऐसी  दूरी

रिश्ते का सम्मान , हटा दे  हर  मजबूरी

टूटे  रिश्ते जुड़ें , सामने  कहता  रब  के  

रहे सरलता भाव, प्रज्वलित अन्दर सब के

 

मौलिक एवँ अप्रकाशित ( संशोधित )

Views: 638

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 7:12am

आदरणीय सुशील भाई , रचना की सराहना के लिये आपका  शुक्रिया। आप सलाह देते संकोच न किया करें , कम से कम मेरी रचना मे। आपकी सलाह उचित है , मै सुधार ज़रूर करूंगा ॥ आभार ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on December 27, 2013 at 7:09am

आदरनीय लक्ष्मण भाई , आपका बहुत बहुत शुक्रिया ॥

Comment by ram shiromani pathak on December 27, 2013 at 12:37am

आदरणीय अखिलेश जी से सहमत हूँ आदरणीय,कृपा कर इसे पुनः देख लें   ………  सादर 

Comment by नादिर ख़ान on December 26, 2013 at 11:58pm

आह भाई वाह, मनभावन कुंडलिया 

बहुत बधाई आदरणीय गिरिराज जी ।

Comment by रमेश कुमार चौहान on December 26, 2013 at 9:56pm

आदरणीय गिरिराजजी, आपके गजल, दोहे के बाद मै पहला छंद देख रहा हूॅ, अस्तु कोटिश बधाई ।

इन पंक्ति पर-

आपस का सदभाव , बढ़ा  दे  ऐसी  दूरी

बंद सिलसिला  करें , बने  ऐसी मज़बूरी

 मै आदरणीयअखिलेश श्रीवास्तव जी से सहमत हॅू ।

Comment by Shyam Narain Verma on December 26, 2013 at 5:51pm
बढ़िया रचना पर हार्दिक बधाइयाँ....
Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on December 26, 2013 at 1:16pm

छोटे भाई गिरिराज ,  कुंडलियों में तुम्हारी पकड़ बनती जा रही है, भाव भी अच्छे हैं,  हार्दिक बधाई ॥

लेकिन बीच की दो पंक्तियों को पढ़ें तो अर्थ उल्टा  क्यों हो जाता है , इस छंद के जानकार और गुणीजन ही बतायेंगे..... जैसे... 

आपस का सदभाव , बढ़ा  दे  ऐसी  दूरी  ///   ( आपस के सदभाव से दूरियाँ कम होती है, मिट जाती है... बढ़ती नहीं )

बंद सिलसिला  करें , बने  ऐसी मज़बूरी ///   ( उपरोक्त कारण से चौथी पंक्ति का अर्थ / भाव भी गलत हो रहा है। )

इस संबंध में कुंडलिया छंद के जानकार और गुणीजन ही कुछ बता सकते है। 

Comment by Sushil Sarna on December 26, 2013 at 12:32pm

aa.Giriraj Bhandaari jee bahut sundr kudli...sundr bhaa....lekin SIR kshma sahit chaturth aur pancham pankti ke visham pankti ka ant laghu maatra se hona chahiye...yadi ham बंद सिलसिला  करें ko  सिलसिला  करें बंद krain to theek rahega isee trah pancham pankti ke visham bhaag ko bhee theek kiya jaa sakta hai....meree kisee baat ko anytha n levain ....kuch galt khaa to kshma chahta hoon....sadar naman

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 26, 2013 at 6:51am

आदरणीय भाई गिरिराज जी ,

लाजवाब कुंडलियों के लिए हार्दिक बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
4 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
4 hours ago
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service