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सुबह का सूरज --नवगीत !

नवगीत 
********
सुबह का सूरज 
आसमान में चढ़ जाये 
 
नव प्रभात के 
शब्द-सुमन ले 
कलरव का 
उसमे चिंतन ले 
किरणो के कुछ छंद 
सलोने गढ़ जाये    …सुबह का सूरज 
 
होते इस परिपक्व 
दिवस में 
किरणे घुल जाती 
नस-नस में 
कदमों पर आरोप 
थकन के मढ़ जाये …सुबह का सूरज 
 
ढलती ये 
संध्या की  बेला
मन हो जाता 
निपट अकेला 
छोड़ मील के पत्थर 
आगे बढ़ जाये  …सुबह का सूरज 
 
सुबह का सूरज 
आसमान में चढ़ जाये 
--------------------------------------
अविनाश बागड़े   मौलिक /अप्रकाशित

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Comment

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Comment by AVINASH S BAGDE on January 3, 2014 at 10:33pm

आदरणीय सत्यनारायण सिंह साहब ,अविनाश बागड़े आपका ह्रदय से आभारी है 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 2, 2014 at 8:36pm

वाह बहुत खूब !

Comment by Neeraj Neer on January 2, 2014 at 6:03pm

बहुत बेहतरीन लिखा है ..

Comment by vijay nikore on January 1, 2014 at 8:11pm

//छोड़ मील के पत्थर 

आगे बढ़ जाये  …सुबह का सूरज //
अच्छे भाव पिरोय  हैं। बधाई।
 
सादर,
विजय निकोर
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 1, 2014 at 5:55pm

सुबह का सूरज आसमान में चढ़ जाए - सुन्दर नवगीत रचना के हार्दिक बधाई और साथ ही -

 वर्ष २०१४ का आपका हर दिन आपको उर्जावान रख प्रगति पथ पर अग्रसर करे इन्ही भावनाओं के साथ हार्दिक मंगल कामनाए 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on January 1, 2014 at 5:39pm
नव प्रभात के 
शब्द-सुमन ले 
कलरव का 
उसमे चिंतन ले 
किरणो के कुछ छंद 
सलोने गढ़ जाये ..............बहुत खूबसूरत 
हार्दिक बधाई आ० अविनाश बागडे जी 
Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on January 1, 2014 at 12:53pm

आदरणीय  अविनाश भाई, नव वर्ष की शुभ कामनाओं के साथ आपको इस सुंदर गीत की भी हार्दिक बधाई॥

Comment by MAHIMA SHREE on December 31, 2013 at 8:12pm
सुबह का सूरज 
आसमान में चढ़ जाये 
नव प्रभात के 
शब्द-सुमन ले 
कलरव का 
उसमे चिंतन ले 
किरणो के कुछ छंद 
सलोने गढ़ जाये    …सुबह का सूरज ..... बहुत बढ़िया बधाई आदरणीय अविनाश सर .. नव वर्ष की बधाई और शुभकामनायें सादर
Comment by Satyanarayan Singh on December 31, 2013 at 5:45pm
आ. अशोक बगाडे जी सादर,

सुन्दर गीत के प्रस्तुति हेतु हार्दिक बधाई तथा नव वर्ष की मंगल शुभ कामनाएं
Comment by AVINASH S BAGDE on December 30, 2013 at 9:14pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी ...ह्रदय से आभार .

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