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हे माँ श्वेता शारदे , सरस्वती वन्दना (उल्लाला छंद पर आधारित )

सरस्वती वंदना  (उल्लाला छंद पर आधारित )

हे माँ श्वेता शारदे , विद्या का उपहार दे

श्रद्धानत हूँ प्यार दे , मति नभ को विस्तार दे

तू विद्या की खान है ,जीवन का अभिमान है

भाषा का सम्मान है ,ज्योतिर्मय वरदान है

नव शब्दों को रूप दे ,सदा ज्ञान की धूप दे

हे माँ श्वेता शारदे ,विद्या का उपहार दे

कमलं पुष्प विराजती ,धवलं वस्त्रं  शोभती

वीणा कर में साजती ,धुन आलौकिक बाजती

विद्या कलष अनूप दे ,आखर- आखर कूप दे

हे माँ श्वेता शारदे ,विद्या का उपहार दे

 

निष्ठा तू विश्वास तू ,हम भक्तों की आस तू

सद्चित्त का आभास तू ,करती तम का ह्रास तू

तम सागर से तार दे ,जीवन का आधार दे

हे माँ श्वेता शारदे ,विद्या का उपहार दे

वाणी में तू रस भरे ,गीतों  को समरस करे 

जीवन को  रोशन करे,तुझसे ही माँ तम डरे 

रस छंदों का हार दे ,कविता ग़ज़ल हजार दे

हे माँ श्वेता शारदे ,विद्या का उपहार दे

जिस को तेरा ध्यान है ,मन में तेरा मान है   

 तेरे तप का  भान है ,मानव वो विद्वान है

जीवन में मत हार दे ,भावों में उपकार दे

हे माँ श्वेता शारदे ,विद्या का उपहार दे

 

 हे धवल हंस वाहिनी, निर्मल सद्मति  दायिनी 

 जड़ मति विपदा हारिणी ,भव सागर तर तारिणी                              , 

सब कष्टों से तार दे,शिक्षा का भण्डार दे 

हे माँ श्वेता शारदे ,विद्या का उपहार दे

हे माँ श्वेता शारदे, श्रद्धानत हूँ प्यार दे  

   (मौलिक एवं अप्रकाशित )

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 23, 2014 at 3:17pm

हार्दिक आभार आ० अजय अज्ञात जी. 

Comment by Ajay Agyat on March 23, 2014 at 3:12pm

अति सुंदर 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 7, 2014 at 8:36pm

प्रिय प्राची जी आपकी प्रतिक्रिया देख कर मन हर्षित है उत्साहित भी की यह वंदना आपको पसंद आई आपका सुझाव सही है लिखते वक़्त सोच भी रही थी इसमें कुछ करुँगी ,बहुत- बहुत आभारी हूँ सस्नेह  


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 6, 2014 at 12:34pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी 

बहुत सुन्दर सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की है ...मन प्रसन्न हो गया इतना सुन्दर छंदबद्ध शारदा वन्दन पढ़ कर. 

सिर्फ दो जगह मैं अपने सुझाव देना चाहती हूँ 

1. तम सागर से तार दे ,जीवन का आधार दे.................यदि तम से तारने की बात हो तो आधार प्रकाश या प्रज्ञा का हो..

2.  हे धवल हंस वाहिनी, निर्मल सद्मति  दायिनी........... रेखांकित अंश में प्रवाह बाधित लगा द्विकल के बाद त्रिकाल लिया गया है इसलिए 

आपको इस सुन्दर सुगढ़ प्रस्तुति पर बहुत बहुत शुभकामनाएं 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 3, 2014 at 11:45am

सरस्वती वंदना को फीचर करने के लिए आ० एडमिन जी को हार्दिक धन्यवाद.जय माँ शारदे  


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 2, 2014 at 4:58pm

सरस्वती वंदना आपको मनोहारी लगी आ० विजय निकोरे जी हृदय तल से आभार आपका.जय माँ शारदे.    

Comment by vijay nikore on March 2, 2014 at 11:21am

इतनी मनोहारी सरस्वती वंदना के लिए आपको हार्दिक बधाई, आदरणीया राजेश जी।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 2, 2014 at 9:59am

जीतेन्द्र गीत जी सरस्वती वंदना पर आपका अनुमोदन मेरे लेखन को सार्थक कर रहा है हृदय से आभारी हूँ ,जय माँ शारदे. 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 2, 2014 at 9:57am

आ० कल्पना मिश्रा जी, सरस्वती वंदना पर आपकी सराहना पाकर हर्षित हूँ ,हार्दिक आभार जय माँ शारदे.  

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on March 2, 2014 at 2:10am

बहुत सुंदर सरस्वती वंदना, बधाई स्वीकारें आदरणीया राजेश जी

कृपया ध्यान दे...

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