For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ज़िंदा हूँ मगर जीने का एहसास नही है

इक उसके चले जाने से कुछ पास नही है
ज़िंदा हूँ मगर जीने का एहसास नही है


वो दूर गया जब से ये बेजान है महफिल

साग़र है सुराही हैं मगर प्यास नही है


सुनने को तिरे पास भी जब वक़्त नही तो

कहने को मिरे पास भी कुछ ख़ास नहीं है

 

इस रूह के आगोश में है तेरी मुहब्बत
माना के तिरा प्यार मिरे पास नही है

रावण तो ज़माने में अभी ज़िंदा रहेगा
क़िस्मत में अभी राम के बनवास नही है

फिर कैसे यक़ी तुझपे करेगा ये ज़माना,
ख़ुद तुझको ही जब अपने पे विश्वास नही है

लेकर तो चला आया समंदर में मैं कश्ती
हिम्मत के सिवा कुछ भी मिरे पास नही है

ये राहे वफ़ा का है सफ़र सोच समझ ले
बस काई पे चलना है यहाँ घास नहीं है 

रिश्ते जो उगे झूठ की मिट्टी में है ‘सूरज’
फूलेंगे फलेंगे ये मुझे आस नही है

डॉ सूर्या बाली ‘सूरज’

Views: 1141

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Omprakash Kshatriya on April 2, 2014 at 3:05pm

शानदार ग़ज़ल . बधाई 

Comment by Zaif on March 28, 2014 at 7:40pm
बहुत उम्दा!! वाह !

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 27, 2014 at 7:26pm

आदरणीय डॉक्र साहब, खेद है, मैं आज आपकी ग़ज़ल पर आ पारहा हूँ. इस उम्दा और क़ामयाब ग़ज़ल का एक-एक शेर दिल में घर बनाता हुआ है. किस एक की बात करूँ.

दिल से बधाई.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on March 26, 2014 at 9:13pm

ये राहे वफ़ा का है सफ़र सोच समझ ले
बस काई पे चलना है यहाँ घास नहीं है 

सुनने को तिरे पास भी जब वक़्त नही तो

कहने को मिरे पास भी कुछ ख़ास नहीं है

बहुत सुन्दर 

हार्दिक बधाई 

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on March 24, 2014 at 4:02pm

क्या बात है..बहुत उम्दा.. दिल खुश हो गया.. और क्या कहूँ इससे ज़्यादा..

इस रूह के आगोश में है तेरी मुहब्बत
माना के तिरा प्यार मिरे पास नही है.. ...वाह

Comment by वीनस केसरी on March 24, 2014 at 1:13am

सुनने को तिरे पास भी जब वक़्त नही तो

कहने को मिरे पास भी कुछ ख़ास नहीं है

छा गए भाई
जिंदाबाद

Comment by डॉ. सूर्या बाली "सूरज" on March 24, 2014 at 12:05am

आप सभी दोस्तों  की दिली दुवाओं के लिए बहुत बहुत शुक्र गुजार  हूँ ! ज़र्रानवाज़ी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! 

Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 23, 2014 at 2:34pm

बहुत खूब सूर्या जी, अच्छे अशआर हुए हैं दाद कुबूल कीजिये

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 23, 2014 at 1:03pm

रिश्ते जो उगे झूठ की मिट्टी में है ‘सूरज’
फूलेंगे फलेंगे ये मुझे आस नही है

शानदार गजल 

जानदार बधाई 

किस्मत मेरी 

आपने सुनाई 

सादर 

Comment by Anil 'Bekas' on March 23, 2014 at 12:17pm
हर एक शेयर कमाल है। बहुत ही उम्दा लिखा आपने।
हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
5 hours ago
Admin posted discussions
20 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 175

 आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ

   जिस-जिस की सामर्थ्य रही है धौंस उसी की एक सदा से  एक कहावत रही चलन में भैंस उसीकी जिसकी लाठी…See More
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आपने कहे को सस्वर किया इस हेतु धन्यवाद, आदरणीय  //*फिर को क्यों करने से "क्यों "…"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना को आपने अनुमोदित कर मेरा उत्साहवर्धन किया, आदरणीय विजत निकोर जी हार्दिक आभार .. "
21 hours ago
Sushil Sarna commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"आदरणीय जी सादर प्रणाम -  अद्भुत सृजन - हृदय तटों को छूती गहन भावों की अभिव्यक्ति ने अहसासों की…"
yesterday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
Monday
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
Monday
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service