For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

एक गज़ल ( कवि - "राज बुन्दॆली")

एक गज़ल

(मफ़ाईलुन,मफ़ाईलुन,मफ़ाईलुन,मफ़ाईलुन)

कहीं सूरत नहीं मिलती,कहीं सीरत नहीं मिलती ॥
वफ़ा करकॆ मुनासिब सी,हमॆं कीमत नहीं मिलती ॥१॥

लियॆ उल्फ़त फिरॆ दर-दर,वफ़ाऒं का भरम पालॆ,
ज़हां मॆं प्यार की हमकॊ,खरी दौलत नहीं मिलती ॥२॥

मिटा दीं आज हमनॆ सब, लकीरॆं हाँथ की अपनॆ,
मिटा दूँ नाम इक तॆरा,  यही ताक़त नहीं मिलती ॥३॥

सुनॆं हैं प्यार कॆ किस्सॆ, ज़मानॆ कॊ बहुत कहतॆ,
किताबॊं मॆं लिखा तॊ है,मगर चाहत नहीं मिलती ॥४॥

दिलॆ - बॆज़ार इतनॆं है, न पूँछॊ हाल तुम इनसॆ,
इबादत रॊज करतॆ  हैं, मगर राहत नहीं मिलती ॥५॥

हमॆं भी प्यार मिल जायॆ, कहाँ तक़दीर अपनी है,
हमारी अब उसूलॊं सॆ, कहीं आदत नहीं मिलती ॥६॥

छुपायॆ "राज" जिनकॆ हैं, लगाकॆ जान की बाजी,
वही बॊलॆ भुला दॊ सब, हमॆं फ़ुर्सत नहीं मिलती ॥७॥

कवि - "राज बुन्दॆली"
२१/०३/२०१४
मौलिक एवं अप्रकाशित रचना

Views: 562

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 27, 2014 at 11:54pm

मिटा दीं आज हमनॆ सब, लकीरॆं हाँथ की अपनॆ,
मिटा दूँ नाम इक तॆरा,  यही ताक़त नहीं मिलती..  उम्दा !!

इस ग़ज़ल पर दाद कुबूल करें भाई्जी

Comment by वीनस केसरी on March 24, 2014 at 1:02am

ये शेर ख़ास तौर पर पसंद आया

दिलॆ - बॆज़ार इतनॆं है, न पूँछॊ हाल तुम इनसॆ,
इबादत रॊज करतॆ  हैं, मगर राहत नहीं मिलती

उम्दा कहा

इस मिसरे के भाव पर फिर से गौर फरमाएं .....
हमारी अब उसूलॊं सॆ, कहीं आदत नहीं मिलती

उसूलों से आदत न मिलना कोई सकारात्मक बात तो है नहीं ...

Comment by बृजेश नीरज on March 23, 2014 at 11:43pm

वाह! बहुत सुन्दर ग़ज़ल! आपको बहुत-बहुत बधाई!

यूँ तो सभी अशआर बहुत अच्छे हैं लेकिन यह शेर विशेष रूप से मुझे पसंद आया-

//मिटा दीं आज हमनॆ सब, लकीरॆं हाँथ की अपनॆ,
मिटा दूँ नाम इक तॆरा,  यही ताक़त नहीं मिलती//

Comment by आशीष नैथानी 'सलिल' on March 23, 2014 at 4:19pm

लियॆ उल्फ़त फिरॆ दर-दर,वफ़ाऒं का भरम पालॆ,
ज़हां मॆं प्यार की हमकॊ,खरी दौलत नहीं मिलती ||  वाह !!

वाह, खूबसूरत ग़ज़ल राज जी !

Comment by gumnaam pithoragarhi on March 22, 2014 at 8:25pm

bahut khoob sir ji achchhi gazal ke liye badhai,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by Omprakash Kshatriya on March 22, 2014 at 7:03am

आप का हरेक शेर तारीफे काबिल है . किसे अच्छा कहे ? समझ में नहीं आ रहा है . हरेक शेर आपने आप में बेहत्तरीन है . बधाई .

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 21, 2014 at 10:25pm

आ0 बुन्देली भार्इ जी, सादर प्रणाम! बहुत खूब गजल कही है। क्या बात है.....//छुपायॆ "राज" जिनकॆ हैं, लगाकॆ जान की बाजी,
वही बॊलॆ भुला दॊ सब, हमॆं फ़ुर्सत नहीं मिलती ॥//------हार्दिक बधार्इ स्वीकारें। सादर,

Comment by Sarita Bhatia on March 21, 2014 at 8:32pm

हमॆं भी प्यार मिल जायॆ, कहाँ तक़दीर अपनी है,
हमारी अब उसूलॊं सॆ, कहीं आदत नहीं मिलती |

वाह आदरणीय खुबसूरत गजल 

Comment by Mukesh Verma "Chiragh" on March 21, 2014 at 3:46pm

बहुत अच्छी ग़ज़ल, बधाई

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15
जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Aug 10
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service