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राम तुम्हें फिर.../गज़ल/कल्पना रामानी

मात्रिक छंद

असुरों के सुर उच्च हुए हैं, मौन मंत्र सिखलाना होगा।

राम, तुम्हें  फिर से कलियुग में, भारत भू पर आना होगा।

 

ओढ़ चदरिया राम नाम की, घूम रहे चहुं ओर अधर्मी।

धर्म-पंथ उनको दिखलाकर, गूढ़-ज्ञान  फैलाना होगा।

 

मानवता का ढोंग रचाकर, रावण ताज सजा  बैठे हैं,।

आग लगा उनकी लंका में, जय का दीप जलाना होगा।

 

मानवता के मूल्य गिर चुके,  रक्षक ही भक्षक हैं सारे।

मूल्य रहें अक्षत हर मन के, ऐसा शंख बजाना होगा।

 

मर्यादाएँ आब खो चुकीं,  बीच भँवर रिश्तों की किश्ती।

हे मर्यादा पुरुषोत्तम! वो  बेड़ा पार लगाना होगा।

 

भोग रहे वनवास घरों में, मात-पिता रहकर एकाकी,

संतानों के सुप्त हृदय में,  सेवा-भाव जगाना होगा। 

 

आज तुम्हारे शासन की, हे रघुनंदन! है ओट ज़रूरी,

पामर खाएँ चोट, तुम्हें कुछ ऐसा चक्र चलाना होगा।  

मौलिक व अप्रकाशित       

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Comment by Ajay Agyat on April 9, 2014 at 7:41pm

बहुत उम्दा 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 9, 2014 at 7:06pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल कही है , आदरणीया कल्पना जी , आपको दिली बधाइयाँ !!  मात्रिक बह्र मैं समझ नही पाया , अगर आप कुछ बता सकें तो मेरे साथ औरों का भी भला हो ॥

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on April 9, 2014 at 12:01pm

आदरणीया कल्पनाजी,

भगवान श्रीराम से सुंदर शब्दों में सुंदर भावों के साथ अनुरोध किया है । हार्दिक बधाई।

Comment by वेदिका on April 9, 2014 at 9:32am
बहुत खूब सूरत राममय गजल के लिए खूब खूब शुभकामनाएं स्वीकारिये आ0 कल्पना दीदी! मन प्रसन्न हो गया राम वन्दना का ये रूप देख कर।
// घूम रहे हैं चहुं ओर अधर्मी,// यहाँ मुझे प्रवाह में अटकाव सा हो रहा है। मार्गदर्शन करें!
सादर
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 9, 2014 at 9:18am

बहुत सुंदर सात्विक गजल कही आपने आदरणीया कल्पना जी, हार्दिक बधाई स्वीकार करें

Comment by savitamishra on April 9, 2014 at 1:00am

बहुत सुन्दर गज़ल आदरणीया कल्पना दी .._/\_


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 8, 2014 at 2:23pm

वाह आ० कल्पना जी बहुत सुन्दर राम वंदना ग़ज़ल के रूप में बहुत खूब ,सच में आज असुर राज बहुत बढ़  गया है भगवान्र राम फिर से जन्म लें ताकि दशा सुधरे .बहुत-बहुत बधाई आपको.  

Comment by Meena Pathak on April 8, 2014 at 1:41pm

बहुत सुन्दर गज़ल आदरणीया कल्पना दी ..बहुत बहुत बधाई | सादर 

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