For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आदमी (प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा )

आदमी 
---------------
ऊँची ऊँची अट्टालिकाएं
बौने लोग
विकृति और स्वभाव
एक दूजे के
पर्यायवाची

चाहरदीवारी के मध्य
शून्य
वर्जनाओं के टूटने का
उदघोष
खामोशी से सुनते हुए
ध्वनि प्रतिध्वनि
संज्ञा शून्य

आहत भावनाये
रिसता खून
अँगुलियों से चाटते हुए
शायद
ये भी नमकीन है
अपनों के लहू जैसा

प्रदीप कुमार सिंह कुशवाहा
मौलिक /अप्रकाशित
२०.०४.२०१४

Views: 632

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on May 1, 2014 at 11:57am

आदरणीया प्राची जी 

सादर 

आपका स्नेह प्राप्त हुआ . होंसला बढ़ा 

आभार 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 30, 2014 at 7:02pm

इस गंभीर रचना पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएं आ० प्रदीप कुशवाहा जी 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:39pm

स्नेही जीत जी खुश रहिये 

सादर आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:39pm

आदरणीय श्री सत्य नारायण सिंह जी 

सादर आभार प्रोत्साहन हेतु 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:38pm

आदरणीया सविता मिश्र जी 

सादर आभार प्रोत्साहन हेतु 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:36pm

आदरणीया सरिता भाटिया जी 

सादर आभार , प्रोत्सन हेतु 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:35pm

आदरणीय श्री अनुराग जी 

सादर 

प्रोत्साहन हेतु आभार 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 23, 2014 at 2:35pm

आदरणीय श्री ब्रजेश जी 

सादर 

संगत का असर है ?

प्रोत्साहन हेतु आभार 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 22, 2014 at 11:32pm

बहुत बेहतरीन रचना, हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीय प्रदीप जी

Comment by Satyanarayan Singh on April 22, 2014 at 9:59pm

उत्कृष्ट प्रस्तुति बधाई स्वीकार करें आदरणीय

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari commented on amita tiwari's blog post करोना -योद्धाओं के नाम
"आदरणीय  समीर साहब तथा बृजेश जी  रचना के स्वागत के लिए  आभारी…"
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post मार ही दें न फिर ये लोग मुझे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय  बृजेश कुमार 'ब्रज' जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई के…"
12 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post मार ही दें न फिर ये लोग मुझे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'जी सादर अभिवादन ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई…"
12 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post मार ही दें न फिर ये लोग मुझे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय समर कबीर साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी शिर्कत और हौसला अफज़ाई के लिये तह-ए -दिल से आपका शुक्रिया अदा…"
12 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सालिक गणवीर's blog post मार ही दें न फिर ये लोग मुझे.....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"बढ़िया ग़ज़ल कही आदरणीय सालिग जी..."
18 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on सचिन कुमार's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल भावपूर्ण है मित्र...आदरणीय समर जी ने सार्थक समीक्षा की है।"
18 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on amita tiwari's blog post करोना -योद्धाओं के नाम
"अच्छी कविता लिखी है आदरणीया..."
18 hours ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मुफलिसी में ही जिसका गुजारा हुआ - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' (गजल)
"अच्छी ग़ज़ल कही आदरणीय धामी जी"
18 hours ago
Veena Gupta posted a blog post

रफ़्तारे ज़िन्दगी

बड़ी तेज़ रफ़्तार है ज़िन्दगी की,मुट्ठी से फिसलती चली जा रही है उम्र की इस दहलीज़ पर जैसे,ठिठक सी…See More
20 hours ago
PHOOL SINGH posted blog posts
20 hours ago
Samar kabeer commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"जनाब नाहक़ साहब आपका बहुत बहुत शुक्रिय:"
yesterday
dandpani nahak commented on Samar kabeer's blog post तरही ग़ज़ल
"परम आदरणीय समर कबीर साहब प्रणाम बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें ! सभी शैर एक से बढ़कर…"
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service