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तान्या : तुम्हे पा कर

तुम आये
मै खुश था
बहुत खुश /
मुझे घेर लेते थे
या कहो
कोशिश करते थे
घेर लेने की /
कुछ अहसास
उल्लास ,दर्प , ईर्ष्या ,द्धेष
सम्मान / कुछ मखमली से
कुछ अनजाने से भी
और मैं उड़ता था / परी कथाओं के
नायक की तरह
पंखों वाले सफ़ेद घोड़े पर
खुशगवार मौसम में
चमकीली धूप में
नीले आसमान में /
सर-सर चलती हवाएं से आगे
और आगे ।

और फिर
जैसा कि सुनता आया था सबसे/
कि ऐसा ही होता है /
तुम चले गये /मानो मुझे एक अंधे कूएँ मैं
फेंक दिया हो ।

मौसम बदल गये /
बदली भी छाती है
कभी कभी
आसमान पर /
और मैं जमीन पर हूँ |


लेकिन मैं खुश हूँ ,
तुम ना आते तो
क्या मैं
वो सारे अहसास
कभी महसूस कर पाता ।
सारे जहां की
बादशाहत पा कर
कैसा लगता है
यह मैंने तुम्हे पा कर जाना /
अच्छा ,,,,अलविदा। ।
नहीं । अलविदा नहीं
शायद तुम लौट आओ ।

मौलिक एवम अप्रकाशित
अरविन्द भटनागर ' शेखर'

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Comment

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Comment by mrs manjari pandey on June 15, 2014 at 10:01pm
अरविन्द भटनागर जी बधाइयाँ सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए।
Comment by ARVIND BHATNAGAR on June 3, 2014 at 11:02pm

आदरणीय सौरभ भाई , शुक्रिया _ आपने रचना को पसंद किया । उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद । 

Comment by ARVIND BHATNAGAR on June 3, 2014 at 10:57pm

बहुत बहुत  , शुक्रिया आदरणीय नीर  साहेब, केवल प्रसाद जी , अरुण जी  । क्षमा प्रार्थी हूँ की जवाब  देने में विलम्ब हुआ ।आशा है स्नेह बनाये रखेंगे 

Comment by ARVIND BHATNAGAR on June 3, 2014 at 10:54pm

बहुत बहुत  , धन्यवाद आदरणीय शिज्जु शकूर जी ,कुन्ती मुख़र्जी  एवं नादिर खान साहेब । कुछ व्यस्तताओं के कारण जवाब देने में विलम्ब हुआ ।आशा है स्नेह बनाये रखेंगे 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 20, 2014 at 3:29am

बहुत खूब ! ..  कुछ अनुभूतियाँ उम्रदराज़ नहीं होतीं. उनके अंदाज़ निहायत अपने-अपने-से होते हैं.  बधाई ..


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on May 4, 2014 at 9:25pm

सुकोमल भावों की मखमली प्रस्तुति.................बधाई.................

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on May 4, 2014 at 12:11pm

हम सदैव ही दूसरों के माध्यम से ही कुछ पा सकते हैं। एकाकी जीवन/अनुभव तो मात्र अहं और हीनता से संलिप्त होता है। बहुत सुन्दर रचना। हार्दिक बधाई स्वीकार करेंं। सादर,

Comment by Neeraj Neer on May 4, 2014 at 10:42am

सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति ..

Comment by coontee mukerji on May 4, 2014 at 12:25am

मन से निकली भावनाएँ जो शब्दों में ढल गयी.अति सुंदर.आपको बहुत बहुत बधाई.

Comment by नादिर ख़ान on May 3, 2014 at 1:30pm

कोमल भावनायें, सुंदर एहसास, हार्दिक शुभकामनायें ..आदरणीय अ.भटनागर जी ...

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