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तरही ग़ज़ल- आयेंगे कब अच्छे दिन तू ही बता !

ग़ज़ल –
फाइलातुन फाइलातुन फाइलुन
२१२२ २१२२ २१२

एक रत्ती कम न ज़्यादा चाहिए |
मांगते हैं हक़ हमारा चाहिए |


कौन कहता है कि राजा चाहिए |
इस सियासत को पियादा चाहिए |


आयेंगे कब अच्छे दिन तू ही बता ,
कब तलक रखना भरोसा चाहिए |


वो मदारी हम जमूरे हैं फकत ,
हम मरें उनको ये वादा चाहिए |


वायदों के गीत गाये पांच साल ,
खेलने को वो खिलौना चाहिए |


उनकी आँखों ने मुझे बतला दिया,
डूबने वालों को दरया चाहिए |


बूँद में मोती की ताक़त है मियां ,
हर किसी को एक मौक़ा चाहिए |


बेटियाँ अफ़सोस अब भी बोझ हैं ,
हो नाकारा फिर भी बेटा चाहिए |


आश्वासन का ही दे दो झुनझुना ,
झूठ का ही हो सहारा चाहिए |

* सर्वथा मौलिक एवं अप्रकाशित .

- (C)अभिनव अरुण

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Comment

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Comment by विजय मिश्र on June 23, 2014 at 3:34pm
"
बूँद में मोती की ताक़त है मियां ,
हर किसी को एक मौक़ा चाहिए |
बेटियाँ अफ़सोस अब भी बोझ हैं ,
हो नाकारा फिर भी बेटा चाहिए |"
---- एहसासों ने कुढ़कर ही सही क्या बेहतरीन रंग लिया है |पूरी गजल पढ़ने पर तो दुष्यन्तजी अपने ऊँचे टोन में उभरने से लगते हैं |बहुत उम्दा , दाद कुबुलें |
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 23, 2014 at 11:09am

एक रत्ती कम न ज़्यादा चाहिए |
मांगते हैं हक़ हमारा चाहिए |

बहुत खूब आ० अरुण भाई -हर शेर लाजवाब है हार्दिक बधाई . साथ ही यह भी कहना है कि - हक़ तुम्हारा है तो हक़ से लीजिए , पर तनिक कर्त्तव्य का निर्वाह भी तो कीजिये .... अन्यथा न लें


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 23, 2014 at 10:14am

आदरणीय अभिनव अरुण भाई , क्या गज़ल कही है ! वाह !! हर शे र एक एक तीर की तरह सही निशाने पर लग रहे हैं ॥ पूरी गज़ल के लिये , हर शे र के लिये अलग अलग दाद हाज़िर है , स्वीकार करें ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 23, 2014 at 8:19am

वाह वाह वाह इस ग़ज़ल के हर शेर की तासीर बयान नहीं की जा सकती सटीक वार किया है आपने हर शेर लाजवाब और सचेत करता हुआ हर शेर के लिये वाह वाह है आदरणीय अभिनव अरुण जी

Comment by Abhinav Arun on June 23, 2014 at 7:25am
आदरणीय श्री डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी आभारी हूँ रचना आपका आशीष पा धन्य हुई !!
Comment by Abhinav Arun on June 23, 2014 at 7:24am
आदरणीय डॉ विजय जी , डॉ मंजरी जी , श्री गुमनाम जी हार्दिक आभार !!
Comment by gumnaam pithoragarhi on June 22, 2014 at 9:54pm

waah sir ji bahut khoob ,,,badhai sweekaren......................

Comment by mrs manjari pandey on June 22, 2014 at 7:04pm
Kहार्दिक बधाई सामयिक ग़ज़ल के लिए अभिनव अरुण जी। बहुत सुन्दर
Comment by Dr. Vijai Shanker on June 22, 2014 at 6:56pm
बहुत सुन्दर अभिनव अरुण जी ,
आश्वासन का ही दे दो झुनझुना ,
झूठ का ही हो सहारा चाहिए |
बहुत बहुत बधाई .
सादर.
Comment by Abhinav Arun on June 22, 2014 at 6:47pm
स्वागत अभिवादन आदरणीया महिमा जी , आभार मेरे अशार पसंद आये , लिखना कहना सार्थक हुआ , थैंक्स !!

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