For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

 (१)
पिसते  हरदम  ही  रहे , मन  में  पाले टीस
तुझको भी मौका मिला, तू भी ले अब पीस
तू  भी  ले  अब  पीस , बना कर खा ले रोटी
हम  चालों   के  बीच , सदा चौसर की गोटी
पूछ   रहा  विश्वास , कहाँ बदला   है मौसम
घुन  गेहूँ  के  साथ , रहे  हैं   पिसते  हरदम ||

(२)
बिल्ली  है  सम्मुख  खड़ी , घंटी  बाँधे कौन
एक  अदद  इस  प्रश्न  पर ,  सारे  चूहे  मौन
सारे   चूहे   मौन   ,  घंटियाँ   शंख   बजाते
मजबूरी   में   नित्य  ,  आरती   सारे  गाते
लिया  सभी  ने  जान , दूर काफी है दिल्ली
घंटी  बाँधे  कौन , खड़ी  सम्मुख  है बिल्ली ||

(मौलिक और अप्रकाशित)

अरुण कुमार निगम
आदित्य नगर, दुर्ग (छत्तीसगढ़)

Views: 594

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2014 at 2:07am

भाई जी दो छन्द में, उचित कहे हैं बात
दिन ही में सपने दिखें, फिर क्यों जोहें रात
फिर क्यों जोहें रात, कमर कसना ही जीवन
भूल गये यह कथ्य, उधड़ती दीखी सीवन
उस पर दिल्ली मोह, बढ़ाने लगती खाई
संकेतों  में   कथ्य,   बधाई  मेरे   भाई

इन प्रासंगिक छन्दों के लिए दिल से बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ, आदरणीय अरुणभाईजी.
सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 30, 2014 at 7:54pm

आदरणीय अरुण निगम जी 

पूछ   रहा  विश्वास , कहाँ बदला   है मौसम ..............बहुत ही सार्थक प्रश्न 
घुन  गेहूँ  के  साथ , रहे  हैं   पिसते  हरदम ||

दूसरी कुण्डलिया की भी सहजता प्रभावित करती है

हार्दिक बधाई 

सादर.

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on June 25, 2014 at 11:44am

कुंडलियों में इशारा साफ़ है 

दो पाटों के बीच पिसनेवाले

हम और आप हैं ..सादर!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 24, 2014 at 4:39pm

आदरणीय अरुण भाई , बहुत दूर से निशाना लगाया है आपने और वो भी सटीक , अलग अलग दो सचाइयों पर बढ़िया व्यंग्य ! आपको दिली बधाइयाँ , दोनो कुंडलियों के लिये ॥

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 23, 2014 at 7:30pm

निगम जी नयी और पुरानी दोनों हीकुंडलिया आपने प्रस्तुत की i अभिव्यक्ति अच्छी है i  लडीवाला जी बहुत दिनों से कुण्डलिया ही लिखते आ रहे है उनका अनुमोदन आपको प्राप्त ही  है i आपको बधाई i

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 23, 2014 at 12:10pm

 सुन्दर कुण्डलिया छंद रची है | वाह ! बहुत बहुत बधाई भाई श्री अरुण कुमार निगम जी -

चोसर की गोटी सदा, हम चालो की बीच

पकड़ न पाए चाल को,लेता सर को भीच 

लेता सर को भीच, तभी प्रभु को याद करे 

जब भी हो कोशिश, तभी प्रभु को भान रहे

दिया कर्म सन्देश,  जिसे भी लेना अवसर  

करे सतत अभ्यास, तभी जीते वह चोसर ||- लक्ष्मण 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
"सर कोई जब न उठा सच की हिमायत के लिएकर्बला   साथ   चले   कौन …"
5 minutes ago
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-190
" स्वागतम "
12 hours ago
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189

ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरे के 190 वें अंक में आपका हार्दिक स्वागत है | इस बार का मिसरा नौजवान शायर…See More
Tuesday
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
Monday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
Sunday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
Sunday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service