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माँ, बहन, बेटी के आँसू

 

माँ, बहन, बेटी के आँसू पे यहाँ रोता है दिल

रोज़ लुटती अस्मतें, क़त्लों का ग़म ढोता है दिल |

 

आबरू को उम्रदारों ने भी बदसूरत किया

मर्दों का बचपन भी है बदकार बद होता है दिल |

 

शाहो-साहब औ’ गँवारों सब में बद शह्वानीयत  

सब की आँखों में चढ़ा शर्मो-हया खोता है दिल |

 

है हुक़ूमत बेअसर बेख़ौफ़ हैं ज़ुल्मो-ज़बर  

हर घड़ी हर साँस जैसे ख़ार पे सोता है दिल |

 

आज भी शै की तरह हैं घर या बाहर औरतें

बेरहम इंसाफ़ भी तेज़ाब से धोता है दिल |

 

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

-- संतलाल करुण 

Views: 1183

Comment

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Comment by Santlal Karun on July 23, 2014 at 3:34pm

आदरणीय विजय शंकर जी,

आप की सराहना से लगा श्रम सार्थक हुआ; हार्दिक आभार !

Comment by Santlal Karun on July 23, 2014 at 3:32pm

आदरणीय लक्षमण धामी जी,

आप के प्रशंसात्मक उद्गार के प्रति हार्दिक आभार !

Comment by Santlal Karun on July 23, 2014 at 3:30pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी,

तारीफ़ के लिए तहे दिल से आभार !

Comment by Santlal Karun on July 23, 2014 at 3:29pm

आदरणीया सविता मिश्रा जी,

प्रेरक उद्गार के प्रति हार्दिक आभार !

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 23, 2014 at 2:29pm
है हुक़ूमत बेअसर बेख़ौफ़ हैं ज़ुल्मो-ज़बर
हर घड़ी हर साँस जैसे ख़ार पे सोता है दिल |
बहुत बहुत बधाई , सादर.
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on July 23, 2014 at 10:30am

आ0 भाई संतलाल जी , हकीकत बयां करती इस बेहतरीन गजल के लिए कोटि कोटि बधाइयां । इसी तरह आपकी बेहतरीन गजलों का आस्वादन करने को मिले यही कामना है । शुभ शुभ....


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 22, 2014 at 8:44pm

आदरणीय संत लाल भाई ,  एक अच्छी गज़ल के लिये आपको मेरी दिली बधाइयाँ ॥

Comment by savitamishra on July 22, 2014 at 12:16pm

बहुत बढ़िया आदरणीय....सादर नमस्ते

Comment by Santlal Karun on July 21, 2014 at 9:16pm

आदरणीय डॉ. गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी,

सराहना के लिए बहुर-बहुत आभार !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 20, 2014 at 9:21pm

करुण जी

लाजवाब i बेहतरीन i

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