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ग़ज़ल - कोई तो मिल जाये जो ठहरा दिखाई दे ( गिरिराज भंडारी )

2122    2122     2122      2   

कोई तो मंज़र कभी अच्छा दिखाई दे

एक तो आदम कभी सच्चा दिखाई दे

 

आपा धापी से लगे हैं पस्त हर कोई

कोई तो मिल जाये जो ठहरा दिखाई दे

 

उथलों में कब ठहरा है बरसात का पानी

ढूँढता है ताल , जो गहरा दिखाई दे   

 

भावनायें गूंगी हो कोनों में हैं सिमटीं  

शब्द क़ैदी सा लगा, पहरा दिखाई दे 

 

कोयला जो राख के नीचे दबा था कल

ये हवा कैसी ? कि वो दहका दिखाई दे  

 

अब बहारों ने क़सम भी खाईं हैं , शायद

कल से कोई बाग़ अब महका दिखाई दे

 

आइनों ने इसलिये बदनामियाँ  झेलीं 

सामने जाओ, सही चहरा दिखाई दे  

*********************************** 

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

 

 

 

 

Views: 831

Comment

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Comment by वेदिका on July 17, 2014 at 3:08pm
आइनों ने इसलिये बदनामियाँ झेलीं
सामने जाओ, सही चहरा दिखाई दे ...... गजल का नायाब शेअर कहूँगी इसे
बहुत सी शुभकामनायें आ0 गिरी राज जी!
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 17, 2014 at 2:50pm

मित्र

बहुत सुन्दर एवं प्रभावशाली गजल्हुयी है i बधाई हो


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 17, 2014 at 2:02pm

आदरणीय गुमनाम भाई , गज़ल की तारीफ के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 17, 2014 at 2:00pm

आदरनीय जिनेद्र भाई , सराहना और उत्साह वर्धन के लिये आपका शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 17, 2014 at 2:00pm

आदरणीय सुशील भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ॥

Comment by gumnaam pithoragarhi on July 16, 2014 at 11:03pm

 

आइनों ने इसलिये बदनामियाँ  झेलीं 

सामने जाओ, सही चहरा दिखाई दे

कोई तो मंज़र कभी अच्छा दिखाई दे

एक तो आदम कभी सच्चा दिखाई दे

badhai sir gazal achchhi lagi,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on July 16, 2014 at 8:45pm

कोई तो मंज़र कभी अच्छा दिखाई दे

एक तो आदम कभी सच्चा दिखाई दे.............बेहतरीन मतला,, आजी का सच

उथलों में कब ठहरा है बरसात का पानी

ढूँढता है ताल , जो गहरा दिखाई दे ................वाह ! बहुत ही गजब,    सोला आने सच

आइनों ने इसलिये बदनामियाँ  झेलीं 

सामने जाओ, सही चहरा दिखाई दे...................आपका अभिप्राय ...आत्म मंथन

बहुत ही कड़वाहट ली हुई सुंदर गजल आदरणीय गिरिराज जी, तहे दिल से बधाइयाँ आपको

Comment by Sushil Sarna on July 16, 2014 at 7:36pm

कोई तो मंज़र कभी अच्छा दिखाई दे
एक तो आदम कभी सच्चा दिखाई दे


वाह क्या बात कह गए आदरणीय गिरिराज जी .... इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए हार्दिक बधाई


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 16, 2014 at 12:35pm

आदरणीय नरेन्द्र भाई , हौसला अफज़ाई के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 16, 2014 at 12:34pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , ग़ज़ल पर आपकी विस्तृत प्रतिक्रिया से आत्मिक खुशी मिली , अशआर की तारीफ के लिये आपका तहे दिल से शुक्रिया ॥

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