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दिल या ख़ुदा मिलता नहीं

 2212  / 2212 /  2212 /  2212

 

दिल के मकाँ में यार कोई दिलकुशा मिलता नहीं

भीगा पड़ा है आशियाँ अब दिलशुदा मिलता नहीं |

 

हमने वफ़ा में बाअदब जानो-ज़िगर सब दे दिया

उनकी वफ़ा, चश्मो-अदा, दिल गुमशुदा मिलता नहीं |

 

उम्मीद हमने छोड़ दी उनकी इनायत पे बसर

ये ज़िन्दगी रहमत-गुज़र दिल या ख़ुदा मिलता नहीं |

 

उनकी वफ़ा के माजरे, बेबस्तगी पे क्या कहें 

उन पे फ़ना दिल रोज़ होता दिल जुदा मिलता नहीं |

 

यों दिलज़दा मेरा फ़साना, दिल लगाना बेक़दर  

जो लापता ढूढें कहाँ दिल गुम हुआ मिलता नहीं |

 

(मौलिक व अप्रकाशित)

--- संतलाल करुण                      

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Comment

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Comment by Santlal Karun on July 23, 2014 at 3:27pm

आदरानीयाक राजेश कुमारी जी,

आप की सराहना से ह्रदय अभिभूत हुआ; हार्दिक आभार !

Comment by Santlal Karun on July 23, 2014 at 3:26pm

आदरणीया वेदिका जी,

रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार !

Comment by Santlal Karun on July 23, 2014 at 3:25pm

आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी,

रचना की प्रशंसा के लिए सहृदय आभार !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 22, 2014 at 8:01pm

उम्मीद हमने छोड़ दी उनकी इनायत पे बसर

ये ज़िन्दगी रहमत-गुज़र दिल या ख़ुदा मिलता नहीं |---लाजबाब 

 

उनकी वफ़ा के माजरे, बेबस्तगी पे क्या कहें 

उन पे फ़ना दिल रोज़ होता दिल जुदा मिलता नहीं |-----शानदार 

सभी अशआर एक से बढ़कर एक ,बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखी है आपने आ० संतलाल जी तहे दिल से दाद कबूलिये 

 

Comment by वेदिका on July 22, 2014 at 6:22pm
उम्दा गजल के लिए हार्दिक बधाई स्वीकारिये आदरणीय संतलाल जी!

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 22, 2014 at 2:26am

आदरणीय इस ग़ज़ल के लिए सादर धन्यवाद.

यों दिलज़दा मेरा फ़साना, दिल लगाना बेक़दर  

जो लापता ढूढें कहाँ दिल गुम हुआ मिलता नहीं .. .

बहुत खूब !!

Comment by Santlal Karun on July 21, 2014 at 9:12pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी,

आप की सराहना भरी प्रतिक्रिया से सृजन का आनंद दुगुना हो गया; सहृदय आभार !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 20, 2014 at 9:56pm

आदरणीय संतलाल भाई , खूब सूरत गज़ल कही है आपने , मेरी दिली बधाइयाँ स्वीकार करें ॥

हमने वफ़ा में बाअदब जानो-ज़िगर सब दे दिया

उनकी वफ़ा, चश्मो-अदा, दिल गुमशुदा मिलता नहीं  - लाजवाब शेर , बधाइयाँ ॥

Comment by Santlal Karun on July 20, 2014 at 9:29pm

आदरणीया मीना पाठक जी, 

ग़ज़ल को लेकर आप के प्रशंसात्मक उद्गार के प्रति हार्दिक आभार !

Comment by Santlal Karun on July 20, 2014 at 9:26pm

आदरणीया मंजरी जी,

ग़ज़ल आप को पसंद आई, प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

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