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1222 1222 1222 1222

झुकी पलकों कि उल्फत का इशारा मिल गया होगा ।
कि सहरा को समंदर का नज़ारा मिल गया होगा ।

अभी था रो रहा बच्चा अभी है खेलता हँसता ,
कि खोया था खिलौना जो दुबारा मिल गया होगा ।

घटाओं की अँधेरी रात में उम्मीद जागी है ,
गगन में टिमटिमाता इक सितारा मिल गया होगा ।

सुखों की ख्वाहिशें जिसने समझ से छोड़ दी होंगी ,
उसे दुःख के भँवर से भी किनारा मिल गया होगा ।

निगाहों ने कहा मुझ से कि सूरत सी नही सूरत ,
फलक से चाँद धरती पर उतारा मिल गया होगा ।

मियादी का समय बीता नहीं आया अभी तक वो ,
कि कोई हमनवा मुझ से पियारा मिल गया होगा ।

भँवर तूफ़ान तो मचले मगर कश्ती सलामत है ,
मुझे मालिक  कि रहमत का सहारा मिल गया होगा ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज मिश्रा

Views: 209

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Comment by विजय मिश्र on August 13, 2014 at 11:00am
'सुखों की ख्वाहिशें जिसने समझ से छोड़ दी होंगी ,
उसे दुःख के भँवर से भी किनारा मिल गया होगा । "
बधाई नीरजजी | हर शे'र सवासेर है | बहुत बेहतरीन उतारा |
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on August 13, 2014 at 9:28am

बहुत खूब!

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 12, 2014 at 11:39am

अभी था रो रहा बच्चा अभी है खेलता हँसता ,
कि खोया था खिलौना जो दुबारा मिल गया होगा ।

बहुत खूब कहा आ० नीरज जी , हार्दिक बधाई .

Comment by Meena Pathak on August 11, 2014 at 8:23pm

बहुत खूब ..बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 11, 2014 at 5:31pm

बहुत सुन्दर कहा आपने i आपको बधाई i

Comment by ram shiromani pathak on August 11, 2014 at 12:28pm

अभी था रो रहा बच्चा अभी है खेलता हँसता ,
कि खोया था खिलौना जो दुबारा मिल गया होगा ।

सुखों की ख्वाहिशें जिसने समझ से छोड़ दी होंगी ,
उसे दुःख के भँवर से भी किनारा मिल गया होगा ।///////वाह भाई वाह। …।  बहुत बहुत बधाई 

Comment by वेदिका on August 11, 2014 at 11:06am
झुकी पलकों कि उल्फत का इशारा मिल गया होगा ।
कि सहरा को समंदर का नज़ारा मिल गया होगा ।
वाह बहुत प्यारा मतला हुआ है।

अभी था रो रहा बच्चा अभी है खेलता हँसता ,
कि खोया था खिलौना जो दुबारा मिल गया होगा ।// बेहतरीन शेअर हुआ है

शुभकामनायें प्रेषित हैं आदरणीय नीरज जी!

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 11, 2014 at 10:30am

आदरणीय नीरज प्रेम भाई , लाजवाब ग़ज़ल कही है , वाह ! मज़ा आगया |

झुकी पलकों कि उल्फत का इशारा मिल गया होगा ।
कि सहरा को समंदर का नज़ारा मिल गया होगा ।

अभी था रो रहा बच्चा अभी है खेलता हँसता ,
कि खोया था खिलौना जो दुबारा मिल गया होगा ।

सुखों की ख्वाहिशें जिसने समझ से छोड़ दी होंगी ,
उसे दुःख के भँवर से भी किनारा मिल गया होगा ।

भँवर तूफ़ान तो मचले मगर कश्ती सलामत है ,
मुझे मालिक  कि रहमत का सहारा मिल गया होगा ।     इन अश'आर के लिए दिली बधाई क़ुबूल करें |

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