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द्वेष,बुराई,दुष्टता ,ना ही हो अनाचार
भेदभाव नफरत मिटे ,करो सभी से प्यार ||


आजादी के बाद भी, ख़त्म हुई ना जंग
गुंडागर्दी है बढ़ी ,दानव फिरें दबंग ||


काम ,मोह, मद, लालसा,फैला भ्रष्टाचार
मानव दानव है बना ,करता अत्याचार ||


देश प्रेम की भावना, होगी तब साकार
दूर हटे जब दीनता ,सपने लें आकार ||

बिजली पानी झोंपड़ी ,इसकी है दरकार
पेट भरे हर एक का, तभी सफल सरकार ||

........................................................

...........मौलिक व अप्रकाशित .................

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Comment

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Comment by Sarita Bhatia on September 13, 2014 at 11:35am

अप सबके स्नेह के लिए हार्दिक आभारी हूँ |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 26, 2014 at 11:34pm

बहुत खूबसूरत दोहे रचे हैं आ० सरिता भाटिया जी 

बस प्रथम दोहे के सम चरण में मात्रिकता पुनः देख लें 

हार्दिक बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 26, 2014 at 7:00pm

बहुत सुन्दर ..परिपक्वता लिए दोहे ...प्रिय सरिता आपकी मेहनत रंग ला रही है बहुत ख़ुशी हुई बस ढेरों बधाई लीजिये .

Comment by Pawan Kumar on August 26, 2014 at 6:07pm

" सुंदर रचना के लिए बहुत बधाई सादर............. "

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 25, 2014 at 6:04pm

आदरणीया

पहले दोहे में ' ना ही हो अनाचार' में 11  के स्थान पर 12 मात्राएँ है i  शेष प्रयास अच्छा है i


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 25, 2014 at 4:50pm

वाह वाह !

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 25, 2014 at 3:38pm
सभी दोहे सुन्दर है, रचना के लिए बधाई, आदरणीय सरिता भाटिया जी,
Comment by savitamishra on August 25, 2014 at 2:13pm

बहुत खुबसुरत दोहें

Comment by Shyam Narain Verma on August 25, 2014 at 2:12pm
" सुंदर रचना के लिए बहुत बधाई सादर............. "
Comment by Sarita Bhatia on August 25, 2014 at 1:53pm

शुक्रिया नरेंद्र जी 

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