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ग़ज़ल - - - सुलभ अग्निहोत्री

कुछ ऐसे सिलसिले हैं जो हमेशा साथ चलते हैं
कुछ ऐसे फासले हैं जोकि यादों में ठहरते हैं

छुपे कुछ राज होते हैं हरेक पैगाम में उसके
कभी हम जान लेते हैं, कभी अनजान रहते हैं

सँदेशे दिल के आते हैं, हमेशा आँख के रस्ते
कभी गालों को तर करते, कभी नूपुर से बजते हैं

वो मेरे साथ ज्यादा रासता तय कर नहीं पाये
पर उतनी राह पर अब भी हजारों फूल खिलते हैं

उन्हें जब याद करते हैं तो कोई गीत होता है
ग़ज़ल होती है जब कोई, उन्हें हम याद करते हैं

वो साँकल पे तेरी थपकी, बजी ज्यों श्याम की वंशी
हमारे कान सुनने को वही धुन फिर तरसते हैं

मौलिक एवं अप्रकाशित

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प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 3, 2014 at 3:46pm

//वो साँकल पे तेरी थपकी, बजी ज्यों श्याम की वंशी
हमारे कान सुनने को वही धुन फिर तरसते हैं//

सांकल पर पडी थपकी से अगर श्याम की बंसी की तान सुनती हो - तो ये मोहब्बत की इन्तहा है साहिब। गज़ब का शेअर हुआ है।

Comment by Sulabh Agnihotri on September 18, 2014 at 3:28pm

बहुत-बहुत आभार harivallabh sharma जी !

Comment by harivallabh sharma on September 17, 2014 at 6:34pm

बहुत बढ़िया ग़ज़ल भाई Sulabh Agnihotri जी वाह...
वो साँकल पे तेरी थपकी, बजी ज्यों श्याम की वंशी
हमारे कान सुनने को वही धुन फिर तरसते हैं...सुन्दर ग़ज़ल हेतु badhai

Comment by Sulabh Agnihotri on September 17, 2014 at 3:19pm

बहुत-बहुत आभार  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी !

Comment by Sulabh Agnihotri on September 17, 2014 at 3:14pm

हुत-बहुत आभार laxman dhami जी !

Comment by Sulabh Agnihotri on September 17, 2014 at 3:13pm

बहुत-बहुत आभार khursheed khairadi जी !

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 17, 2014 at 11:42am

सुलभ जी

बहु बढ़िया गजल हुयी है i  मुबारक हो .

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 17, 2014 at 10:53am

कुछ ऐसे सिलसिले हैं जो हमेशा साथ चलते हैं
कुछ ऐसे फासले हैं जोकि यादों में ठहरते हैं

आदरणीय सुलभ अग्निहोत्री जी बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई स्वीकारें .

Comment by khursheed khairadi on September 17, 2014 at 9:19am

वो मेरे साथ ज्यादा रासता तय कर नहीं पाये
पर उतनी राह पर अब भी हजारों फूल खिलते हैं

आदरणीय सुलभ साहब मुकम्मल ग़ज़ल के खुबसूरत अशहार पर ढेरों दाद स्वीकार स्वीकार करें |वा...ह 

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