For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

लघुकथा : दिवाली

"बाबू जी, दीये ले लो, बहुत सस्ते हैं, इतना बड़ा त्यौहार है ! "

आठ साल की फटी हुई फ्रॉक ने एक रेशम के कुर्ते को पीछे से खींचते हुए पूछा !

"अच्छा, बड़ा त्यौहार है ! पता भी है क्यों मनाते हैं बड़ा त्यौहार ?"

" हाँ, भगवान रामचन्दर ने बहुत सारे दीये ख़रीदे थे !"

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 859

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shubhranshu Pandey on October 28, 2014 at 11:31am

बहुत मार्मिक कथा.

सादर.

Comment by Neeles Sharma on October 14, 2014 at 6:58am

खुर्शीद जी ,बहुत बहुत शुक्रिया आपके प्रोत्साहन के लिए ,आभारी हूँ !

Comment by khursheed khairadi on October 13, 2014 at 10:33pm

आदरणीय नीलेश जी बहुत मार्मिक ,सुन्दर रचना है |बचपन में एक कहानी पढ़ी थी जिसमें एक कुल्फ़ी वाला भरी दोपहर में निकल रही एक शवयात्रा के राम नाम सत्य है के साथ 'ठंडी मीठी कुल्फ़ी 'की टेर लगा बैठता है |आपकी रचना वैसी ही सार्थक है |हार्दिक अभिनन्दन 

Comment by Neeles Sharma on October 13, 2014 at 10:30am

बहुत बहुत धन्यवाद स्वर्ण नायक जी 

Comment by Neeles Sharma on October 13, 2014 at 10:29am

आपका प्रोत्साहन अच्छा लिखने को प्रेरित करेगा जितेंदर जी 

Comment by Neeles Sharma on October 13, 2014 at 10:28am

तहेदिल से शुक्रिया आपका mam rajesh kumari ji

Comment by Neeles Sharma on October 13, 2014 at 10:27am

बहुत बहुत शुक्रिया भाई  somesh kumar जी 

Comment by संदेश नायक 'स्वर्ण' on October 13, 2014 at 1:25am

बंधु निलेस जी, इस भावात्मक एवं गागर में सागर सहेज लेने वाली लघु कथा के लिए आपको बहुत बहुत बधाई ।  

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 13, 2014 at 12:05am

बहुत ही सुंदर लघुकथा. दिल को छू गई उतनी ही  मासूमियत से, बहुत -बहुत बधाई आपको आदरणीय नीलेश जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 12, 2014 at 6:59pm

वाह्ह्ह्ह बच्चे की मासूमियत बहुत बड़ी बात कह गई ...गरीब के घर में तभी तो दिवाली आएगी जब उनके दीये बिकेंगे .बहुत सुन्दर कहानी लिखी है .हार्दिक बधाई आपको निलेश शर्मा जी |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

*दोहा*बरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।।*चौपाई*वह फुहार वह साथ…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Tuesday
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Tuesday
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Tuesday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Saturday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Jul 9
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service