For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मत लिखना आने की बात

मत लिखना आने की बात

मत लिखना आने की बात

 आने से पहले

 जो ना आए, नियत वक्त पे

 झल्लाएगा मन

 उठेंगे सौ-सौ प्रश्न

 तुम्हारे बारे में

 लपटें उठ जाएंगी

 राख ढके अंगारे में

 अच्छा है बिन बतलाए आओ

 बिना कोई उम्मीद जगाए

 आ जाओ जो ऐसे एक दिन

 दिल होली, दिवाली, ईद मनाए |

  सोमेश कुमार(08/08/2014) (मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 615

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 21, 2014 at 4:44pm

भाई गणेशजी, नये हस्ताक्षर को सटीक सुझाव और सलाह के लिए साधुवाद..
आपका संशोधन वस्तुतः नये रचनाकार केलिए मार्गदर्शक होना चाहिये. किन्तु, इन्हें सर्वप्रथम सुग्राही बनना होगा. संवेदना प्रस्तुति की पंक्तियों से ही नहीं, प्रस्तुति के आचरण से भी अभिव्यक्त होनी चाहिये.

वैसे अतुकान्त कविताओं की एक और शैली ऐसे भी हो सकती है, जिनके कारण अतुकान्त रचनाएँ साहित्यांगन में इस तरीके प्रभावी हो गयी हैं -

आने से पहले न लिखना आने की बात
जो न आए नियत वक्त पर
मन झल्लाएगा !
सौ प्रश्न कौंधेंगे
लपटें उठेंगी राख ढके अंगारों से.

अच्छा है, आ जाओ बिन बतलाए / ऐसे ही एक दिन
बिना कोई उम्मीद जगाए
उस दिन..
होली, दिवाली, ईद
साथ मनायेंगे.. .


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on December 21, 2014 at 4:29pm

सोमेश जी, इस प्रयास पर मैं बधाई देता हूँ, कविता के तत्व मौजूद हैं हां कसावट की कमी जरुर है जो धीरे धीरे ही सधेगा, होता क्या है कि जो चीजे हमारी नज़रों से नहीं पकड़ में आती उसे पाठक पकड़ लेते हैं . 

एक बानगी देखिये .....इसी कविता को यदि मैं लिखता .....

आने से पहले

आने की बात...

मत लिखना

गर न आए नियत वक्त पे

झल्लाएगा मन

कौंधेंगे सौ प्रश्न

उठेंगी लपटें 

राख ढके अंगारों से 

अच्छा है

आ जाओ

बिन बतलाए

बिन कोई

उम्मीद जगाए

बस आ जाओ

ऐसे ही

एक दिन

होली, दिवाली, ईद

साथ मनायेंगे

उस दिन  |

***


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 21, 2014 at 11:40am

इस रचना के आलोक में बात की जाय तो आपके रचनाप्रयास में यथोचित संभवना दिखायी देती है जिसे आप अपने दीर्घकालिक सतत प्रयासों से दिशायुक्त कर सकते हैं. भाई सोमेशजी, आगे यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने लेखन की नैसर्गिक प्रवृति के प्रति कितने गंभीर हैं.
हार्दिक शुभेच्छाएँ और बधाइयाँ

Comment by somesh kumar on December 21, 2014 at 8:13am

sukriya archna ji evm bhai mithlesh ji


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 21, 2014 at 12:24am

मत लिखना आने की बात............ बधाई 

Comment by somesh kumar on December 20, 2014 at 10:23pm

शुक्रिया ,तीनों अजीज बंधुओं का 

Comment by gumnaam pithoragarhi on December 20, 2014 at 8:25pm

वाह अच्छी कविता है भाई जी

Comment by Hari Prakash Dubey on December 20, 2014 at 6:04pm

सोमेश भाई ....

अच्छा है बिन बतलाए आओ

 बिना कोई उम्मीद जगाए......शानदार ,हार्दिक बधाई !

Comment by Shyam Narain Verma on December 20, 2014 at 5:05pm

 सुन्दर अभिव्यक्ति पर हार्दिक बधाई।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Mar 30
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Mar 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Mar 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Mar 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Mar 29
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Mar 29

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service