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एक-एक शून्य(लघुकथा)

"देखिये श्रीमान आपका बेटा फिर से हर विषय में फेल हो गया है, किसी में 5, किसी में 6, किसी में 7 नंबर, इसीलिए आपको बुलाना पड़ा I लीजिये आप खुद ही इसकी सारी कॉपी देख लीजिये I" "

"अरे गुरूजी ये लीजिये, अब लिफाफा पकड भी लीजिये, आपका ही बच्चा है ,बस एक-एक शून्य लगा दीजिये I"

.

© हरि प्रकाश दुबे

"मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment by Hari Prakash Dubey on January 5, 2015 at 6:56pm

 लघुकथा  का मर्म जानकर प्रतिक्रिया देने , और उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार ,आदरणीया प्रतिभा  त्रिपाठी जी !"

Comment by Hari Prakash Dubey on January 5, 2015 at 6:51pm

हार्दिक आभार , सोमेश भाई ,आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा रहती है ,सादर .

Comment by Hari Prakash Dubey on January 5, 2015 at 6:50pm

सार्थक प्रतिक्रिया  के लिए आपका धन्यवाद  श्री राम शिरोमणि पाठक जी !

Comment by somesh kumar on January 5, 2015 at 5:13pm

sndesh accha hai ,is lghuktha ka 

Comment by ram shiromani pathak on January 5, 2015 at 3:28pm

मैं लघुकथा के विषय में ज्यादा नहीं जानता लेकिन मुझे अच्छी लगी आदरणीय//हार्दिक बधाई आपको 

Comment by Hari Prakash Dubey on January 4, 2015 at 10:59pm

आपका हार्दिक आभार आदरणीय मिथिलेश जी ! सादर !

Comment by Hari Prakash Dubey on January 4, 2015 at 10:58pm

आदरणीय डॉo गोपाल नारायण सर , आपकी और आदरणीय इं. गणेश जी  "बागी" सर की बात सर आँखों पर , आपने सही कहा ..यह जल्दबाजी  का लेखन नहीं है ...आप लोगों का  स्नेह , और मार्गदर्शन हमेशा अपेक्षित रहेगा , रचना पर आपकी उपस्तिथी ही उत्साहवर्धक है ,आभार सादर।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 4, 2015 at 7:25pm
आदरणीय हरिप्रकाश जी गुणीजनों का आशीर्वाद आपको मिलता रहे। इस प्रयास पर बधाई प्रेषित है
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 4, 2015 at 7:16pm

हरि प्रकाश जी

आ0  योगराज जी ने मेरी भी कई बार क्लास लगाई है i कोई संवाद  या कोई अनुभव  अपने आप में कथा  नही है  I  वर्णन में कथा-तत्व का होना भी आवश्यक हाँ i  आ० बागी जी का  संभवतः यही कथन है i यह जल्दबाजी  का लेखन नहीं है I  इधर कई कथाये  ऐसी आयी है जिन्हें लघुकथा कहने मे मुझे मन ही मन संकोच हुआ है I पर-- प्रयास तो प्रयास ही है I  आपसे तो सदा ही बेह्तर की उम्मीद करता हूँi मैं भी कोइ विशेषज्ञ नहीं हूँ i  सीख मैं भी रहा हूँ i सादर i

Comment by Hari Prakash Dubey on January 4, 2015 at 4:14pm

आदरणीय इं. गणेश जी  "बागी" सर , इसके माध्यम से सन्देश देना चाह रहा था की किस तरह आज के अभिभावक बच्चों को सही शिक्षा ना देकर सबकुछ पैसे से खरीद लेना चाहते है , बाकी आपकी टिप्पणी को हमेशा सकरात्मक रूप  से ही लेता हूँ , आपका सम्मान एक गुरु की तरह है , हमेशा आपके मार्ग दर्शन की अभिलाषा रहेगी , सीखने का प्रयास जारी रहेगा , सादर !

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