For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल : वक़्त भी लाचार है.

** ग़ज़ल : वक़्त भी लाचार है.

2122,2122,212

आदमी क्या वक़्त भी लाचार है.

हर फ़रिश्ता लग रहा बेजार है.

आज फिर विस्फोट से कांपा शहर.

भूख पर बारूद का अधिकार है.

क्यों हुआ मजबूर फटने के लिए.

लानतें उस जन्म को धिक्कार है.

औरतों की आबरू खतरे पड़ी,

मारता मासूम को मक्कार है.

कर रहे हैं क़त्ल जिसके नाम पर,

क्या यही अल्लाह को स्वीकार है.

कौम में पैदा हुआ शैतान जो,

बन मसीहा आ गया गद्दार है.

नेकियाँ हर धर्म के उपदेश में,

बदनुमा किस धर्म में किरदार है.

पाक दामन साफ़ हो अपना जिगर,

छूत रोगी घर घुसे बेकार है.
**हरिवल्लभ शर्मा.

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 1014

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by harivallabh sharma on January 13, 2015 at 12:55am

आदरणीय मोहन बेगोवाल जी आपकी सुन्दर समीक्षा एवं हौसला अफजाई हेतु हार्दिक शुक्रिया..सादर.

Comment by harivallabh sharma on January 13, 2015 at 12:53am

आदरणीय Madan Mohan saxena जी ग़ज़ल पर स्नेहिल प्रतिक्रिया देकर हौसला अफजाई हेतु हार्दिक आभार आपका.

Comment by मोहन बेगोवाल on January 12, 2015 at 4:02pm

  आज के माहौल को पेश करते  सभी अश'आर लाजवाब -बधाई हो 

Comment by Madan Mohan saxena on January 12, 2015 at 3:19pm

कर रहे हैं क़त्ल जिसके नाम पर,
क्या यही अल्लाह को स्वीकार है.
कौम में पैदा हुआ शैतान जो,
बन मसीहा आ गया गद्दार है.

बेहद उम्दा ग़ज़ल ,वाह वाह ! क्या बात है

Comment by harivallabh sharma on January 12, 2015 at 11:56am

आदरणीय khursheed khairadi साहब आपका स्नेह ग़ज़ल को मिला आपका हार्दिक आभार, कृपया मार्गदर्शन देते रहें, सादर.

Comment by harivallabh sharma on January 12, 2015 at 11:54am

आदरणीय ajay sharma जी आपने पोस्ट पर ध्यान देकर उत्साह वर्धन किया आपके मार्गदर्शन का हार्दिक स्वागत एवं आभार ..सादर .

Comment by harivallabh sharma on January 12, 2015 at 11:51am

आदरणीय बागी साहब तीसरे शेर ..

क्यों हुआ मजबूर फटने के लिए.

लानतें उस जन्म को धिक्कार है.....को परिवर्तित कर 
बन गया इंसान से बम किस लिए,

लानतें उस शख्स को धिक्कार है...करना चाहता हूँ...आप सुधिजन की कृपया देख लें.

Comment by khursheed khairadi on January 11, 2015 at 7:11pm

नेकियाँ हर धर्म के उपदेश में,

बदनुमा किस धर्म में किरदार है.

आदरणीय हरिवल्लभ सर ,उम्दा ग़ज़ल हुई है |बहुत बहुत बधाई |सादर अभिनन्दन |

Comment by ajay sharma on January 10, 2015 at 10:50pm

sabhi sher saaf aur dhardaar lage .....jaha tak dusre aur tisre sher ka arth .....hai ...to apki tippadi se vo bhi saaf saaf ho gaya ......चन्द रुपयों की लालच में ये कार्य करने को मजबूर हैं..उनकी जान के बदले उनके परिजन को पैसे भेज दिए जाते हैं...पेट भरने के लिए निकले लोग ही इसके शिकार होते हैं..विस्फोट में खाने कमाने निकले लोग ही अक्सर मरते हैं..... sahi kaha apne .....yahi hallat hai mulq aur dusre desho me bhi .....pata nahi kyo ..............hame hal dhoondna chahiye ..

Comment by harivallabh sharma on January 10, 2015 at 10:22pm

आदरणीय सोमेश कुमार जी आदरणीय बागी जी की बात से सहमत हूँ..शेर परिवर्तित कर शीघ्र पुनः हाजिर होता हूँ..सादर 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
1 hour ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
5 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
5 hours ago
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
5 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
6 hours ago
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
Sunday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
Sunday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
May 19
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
May 19

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service