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खामोशी ने ऐसी खता की ......

खामोशी ने ऐसी खता की 
बात न की पर उसने जता दी

दिए हैं उसने ज़ख़्म अगर तो 
दवा भी उसने हमें लगा दी

न जाने क्या-क्या था सोच रखा 
मिला जो उसने , शरत लगा दी

मेरी अना थी , गुरूर उसका 
मगर ये रिश्ते में इक वफ़ा थी

खत इक लिखा , फिर ज़वाब उसका 
था काम इतना , उमर लगा दी

बग़ैर उसके , सफ़र कहाँ था 
कभी था चेहरा , कभी सदा थी

अजय कुमार शर्मा
मौलिक प्रकाशित

Views: 442

Comment

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Comment by JAWAHAR LAL SINGH on January 21, 2015 at 8:22pm

बहुत ही सुन्दर शब्द संयोजन! बेहतरीन गजल!

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on January 21, 2015 at 12:04pm

खामोशी ने ऐसी खता की 
बात न की पर उसने जता दी - वाह ! मौन रहकर सब कुछ कह देना 

दिए हैं उसने ज़ख़्म अगर तो 
दवा भी उसने हमें लगा दी |  - - बहुत  खूब | उम्दा  भाव  गजल के लिए बधाई श्री अजय कुमार शर्मा जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on January 21, 2015 at 10:31am

बग़ैर उसके , सफ़र कहाँ था 
कभी था चेहरा , कभी सदा थी           --------- लाजवाब बात कही ! बधाइयाँ आदरणीय अजय भाई ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on January 19, 2015 at 10:43pm
सुन्दर रचना। हार्दिक बधाई स्वीकारें आदरणीय अजय शर्मा जी
Comment by Hari Prakash Dubey on January 19, 2015 at 6:53pm

 गज़ब ढा दिया  आदरणीय  अजय  जी .......खत इक लिखा , फिर ज़वाब उसका ..था काम इतना , उमर लगा दी....बहुत सुन्दर !

Comment by Shyam Narain Verma on January 19, 2015 at 11:37am

बहुत सुंदर रचना, बधाई

Comment by Archana Tripathi on January 19, 2015 at 10:41am
सुन्दर

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