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फंस गया चुंगल में जब शैतान के
हौसले बढने लगे इंसान के

तुमसे ये लग़ज़िश न हो जाए कहीं
हम बहुत पछताए दिल की मान के

उन से कह दो छोड़ दें भारत मिरा
लोग जो हामी हैं पाकिस्तान के

आप क्यूं ज़हमत उठाते हैं जनाब
ख़ुद ही दुश्मन हैं हम अपनी जान के

फ़िक्र उक़्बा की न दुनिया का ख़याल
सो गए ग़फ़लत की चादर तान के

बरकतें होने लगीं नाज़िल "समर"
पाँव घर में क्या पड़े महमान के

समर कबीर /मौलिक रचना अप्रकाशित

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Comment by Samar kabeer on January 27, 2015 at 10:47pm
अतुल जी, बहुत बहुत शुक्रिया|
Comment by atul kushwah on January 27, 2015 at 10:30pm

Wah samar kabeer sahab.. bahut khoob

Comment by Samar kabeer on January 27, 2015 at 3:35pm
जनाब लक्ष्मण धामी जी, बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on January 27, 2015 at 10:45am

उन से कह दो छोड़ दें भारत मिरा
लोग जो हामी हैं पाकिस्तान के

आ० समर  भाई , बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है हर शेर गहरी बात लिए है . हार्दिक बधाई .

Comment by Samar kabeer on January 26, 2015 at 5:30pm
मोहतरमा महिमा श्री जी,
शुक्रिया
Comment by Samar kabeer on January 26, 2015 at 5:11pm
जनाब राहुल डांगी साहिब बहुत बहुत शुक्रिया
Comment by MAHIMA SHREE on January 26, 2015 at 5:08pm

आप क्यूं ज़हमत उठाते हैं जनाब
ख़ुद ही दुश्मन हैं हम अपनी जान के

फ़िक्र उक़्बा की न दुनिया का ख़याल
सो गए ग़फ़लत की चादर तान के.....बहुत खूब...बधाई

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 26, 2015 at 5:04pm
आदरणीय एक एक शे'र लाजवाब मजा आ गया वाह!
Comment by Samar kabeer on January 26, 2015 at 4:04pm
जनाब शिज्जू "शकूर" साहिब ,आदाब , मेरी ग़ज़ल का मतला आप की समझ में नहीं आ रहा है, यही शिकायत मेरे भाई गिरिराज भंडारी जी और भाई ख़ुरशीद ख़ैराडी जी की भी है| मै मतले की ताशरीह यह करूंगा कि "शैतान बुराइ का प्रतीक है,और इंसान जब बुराई मे लिप्त हो जाता है तो उसके दिल से ईश्वर का डर व सम्मान पूरी तरह निकल जाता है और उसका हौसला इतना बढ़ जाता है कि वह ईश्वर से भी बग़ावत करने से नहीं चूकता ,इस तरह की कई मिसालें दुनिया के इतिहास में देखने को मिल सकती हैं एक,नेक(अच्छा) इंसान जो कोई बुराई करने से डरता है और शैतान के चुंगल में फंसने के बाद उसमे इतना हौसला आ जात है कि वह उस बुराई को कर गुज़रता है"उम्मीद है मेरे भाईयों कि आपका इतमिनान शायद हो गया होगा|
Comment by Samar kabeer on January 26, 2015 at 3:08pm
भाई मिथिलेश वामनकर जी,आदाब अर्ज़ करता हूँ ग़ज़ल पसंद करने के बहुत बहुत शुक्रिया!

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