For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल-झील सा शीतल चाँद से सुन्दर लिख्खा है |

झील सा शीतल चाँद से सुन्दर लिख्खा है
हमने जो देखा है मंज़र लिख्खा है

अबजद हव्वज़ का भी जिन को इल्म नहीं
दुनिया ने उन को भी सुख़नवर लिख्खा है

आज उसी पर फूल वफ़ा के खिलते हैं
तुमने जिस धरती को बंजर लिख्खा है

पढ़कर देखो मेरी इन तहरीरों को
तुमको ही उन्वान बनाकर लिख्खा है

कुछ लोगों ने दौर-ए-ख़िज़ाँ के बारे में
कमरे में फूलों को सजाकर लिख्खा है

हमने बग़ावत करके सारी दुनिया से
महरूमी का नाम सिकन्दर लिख्खा है

"समर कबीर"
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 1541

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on March 21, 2015 at 10:54am
जनाब धर्मेन्द्र जी, जनाब वीनस केसरी जी,मोहतरमा निधि अग्रवाल जी,मोहतरमा प्रतिभा त्रिपाठी जी,आदाब,हौसला अफ़ज़ाई के लिये आप सभी का तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ |
Comment by धर्मेन्द्र कुमार सिंह on March 19, 2015 at 10:36am
बहुत खूब समर साहब, अच्छी ग़ज़ल हुई है। दाद कुबूल कीजिए

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 18, 2015 at 4:40am

मो. समर कबीर साहब,

इस मंच की परिपाटी के अनुसार ग़ज़लों को पोस्ट करते समय ग़ज़लकार अपनी ग़ज़ल के मिसरे का वज़न लिख दिया करते हैं. आपने भी इस पर अवश्य ध्यान दिया होगा. चूँकि यह मंच ’सीखने-सिखाने’ की अवधारणा पर कार्य करता है, मिसरों के वज़न दे दिये जाने से नव हस्ताक्षरों को ग़ज़ल को समझने में सहुलियत होती है.

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 18, 2015 at 4:35am

आदरणीया निधि जी,

आदरणीया समर साहब की यह ग़ज़ल फेलुन फेलुन .. फ़ा  के अनुसार ग्यारह ग़ाफ़ (गुरु) पर सधे मिसरे की ग़ज़ल है.

यानी, २२ २२ २२ २२ २२ २

इस तरीके की ग़ज़लों में दो लाम (लघुओं) को एक गुरु की तरह व्यवहृत किया जा सकता है. आप इस मंच पर उपलब्ध ग़ज़ल के पाठों को कृपया ध्यान से पढ़ जाइये.

शुभेच्छाएँ

Comment by Nidhi Agrawal on March 17, 2015 at 3:43pm

आज उसी पर फूल वफ़ा के खिलते हैं
तुमने जिस धरती को बंजर लिख्खा है

पढ़कर देखो मेरी इन तहरीरों को
तुमको ही उन्वान बनाकर लिख्खा है

बहुत खूबसूरत भाव बने हैं सर.. मेरी जानकारी के लिए क्या आप इसकी बहर बताएँगे?

Comment by वीनस केसरी on March 17, 2015 at 2:14am

वाह वा जनाबे आली

ज़िन्दाबाद ज़िन्दाबाद

Comment by Samar kabeer on March 16, 2015 at 1:57pm
जनाब डा.विजय शंकर जी,जनाब सौरभ पाँडे जी,मोहतरमा राजेश कुमारी जी,महर्षि जी,ई.गणेश जी बाग़ी जी,आदाब अर्ज़ करता हूँ,और आप सभी का तहे दिल से शुक्रगुज़ार हूँ,मेरे बेटे की परिक्षा ख़त्म होने में मात्र चार दिन शेष हैं इसके बाद मंच पर पुन: उपस्थित होता हूँ,एक बार फिर मंच को दिल से धन्यवाद करता हूँ|
Comment by Dr. Vijai Shanker on March 15, 2015 at 8:15pm
बस कुछ नहीं , आपकी इस रचना के माह की सवश्रेष्ठ रचना चुने और घोषित किये जाने पर खुशी दिल से हुयी , बहुत हुयी , दिल बहुत खुश हुआ , आपको बहुत बहुत मुबारकबाद , आदाब , सादर।

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 15, 2015 at 7:40pm

पढ़कर देखो मेरी इन तहरीरों को
तुमको ही उन्वान बनाकर लिख्खा है

कुछ लोगों ने दौर-ए-ख़िज़ाँ के बारे में
कमरे में फूलों को सजाकर लिख्खा है

ग़ज़ब !
लेकिन मतले और मक्ते का ज़वाब नहीं.  दिल से बधाई कुबूल करें आदरणीय.
आपकी प्रस्तुत ग़ज़ल को विगत माह की सर्वश्रेष्ठ रचना चयनित होने पर विशेष बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ
 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 8, 2015 at 9:55am

बहुत ही लाजबाब ग़ज़ल हुई है आ० समर कबीर जी,देरी से पढने का खेद है  

आज उसी पर फूल वफ़ा के खिलते हैं
तुमने जिस धरती को बंजर लिख्खा है------एक ऐसा शेर जिसको बरसों बरस तक भूल नहीं पायेंगे ...कमाल कमाल 

बहुत बहुत बधाई आपको ढेरों दाद कबूलें 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"प्रस्तुति का सहज संशोधित स्वरूप।  हार्दिक बधाई"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, प्रदत्त चित्र को आपने पूरे मनोयोग से परखा है तथा अंतर्निहित भावों को…"
21 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी, आपने प्रस्तुति के माध्यम से प्रदत्त चित्र को पूरी तरह से शाब्दिक किया है…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का हार्दिक धन्यवाद  परन्तु, रचना सोलह मात्राओं खे चरण…"
22 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण भाईजी, चौपाई छंद में आपने प्रदत्त चित्र को उपयुक्त शब्द दिये हैं. सुगढ़ रचना के…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार। तुकांतता के दोष में…"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। चौपाइयों पर उपस्थिति, स्नेह और मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। आपकी…"
23 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद आभार आपका लक्ष्मण भाईजी"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"हार्दिक धन्यवाद लक्ष्मण भाई "
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी आदरणीय अशोक भाईजी  चौपाई में चित्र का  सम्पूर्ण  चित्रण हुआ है।…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 176 in the group चित्र से काव्य तक
"चप्पल उसकी सिली न जाती। बिन चप्पल के वह रह जाती।।....वाह ! वाह ! प्रदत्त चित्र की आत्मा का भाव आपने…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service