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चींटियाँ .......'इंतज़ार'

जब तुम गयी हो
तो दिल का भवंरा बेसुध
तेरे दिल के बंद दरवाज़े से
जा टकराया
और गिर पड़ा जमीन पर
होश ना रहा उसको !
जब जागा नींद से
तो बेवफ़ाई की चींटियों ने
था उसे घेरा हुआ
नोच नोच कर खा रहीं थी
मेरे दिल के नादान भंवरे को
घसीटते हुए ले जा रहीं थी
अपनी मांद में
तड़पा था बहुत
कोशिश भी की छुटने की
जालिमों ने मौका न दिया
सोचा.... लोग तो चार कांधों की
आरजू करते हैं
और मुझे चार नहीं
हज़ार कांधे नसीब हुए
और इतना प्यार
कि मरने पर भी
मुझे अपने घर ले गई
देख तेरी बेवफ़ाई की
यूँ जीत कर भी हार हुई.......

*****************************************

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 674

Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on April 3, 2015 at 6:48pm
एक अलग दर्शन , अलग तादात्म्य , बधाई , आदरणीय मोहन सेठी जी , सादर।
Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 3, 2015 at 3:52pm

आदरणीय Shyam Mathpal जी आभारी हूँ आप का ...आप लोगों की वजह से ही हौंसले बने रहते हैं ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 3, 2015 at 3:50pm

आदरणीय  krishna mishra 'jaan'gorakhpuri जी आप की टिप्पणी की लिये दिल से आभार ...कलम को उड़ान मिल गई ....सादर  

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 3, 2015 at 3:45pm

आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी प्रसंशा के लिये आभारी हूँ ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 3, 2015 at 3:43pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी हार्दिक आभार ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 3, 2015 at 3:41pm

आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी पसन्दगी के लिये धन्यवाद ...सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 3, 2015 at 3:40pm

आदरणीय laxman dhami जी बहुत बहुत धन्यवाद ! सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 3, 2015 at 3:38pm

आदरणीय  somesh kumar जी धन्यवाद ...जी बिलकुल नहीं आप की सौगात को चींटियों के हवाले नहीं करूँगा ....सादर 

Comment by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 3, 2015 at 3:33pm

आदरणीय Shyam Narain Verma जी आभार 

Comment by Shyam Mathpal on April 2, 2015 at 8:11pm

आदरणीय मोहन सेठी जी,

कैसा दर्द कैसा अंत . बहुत खूब. आपको ढेरों बधाई.

कृपया ध्यान दे...

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