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गजल --तू मुस्करा के देख ले दिल से लगा के देख ले

2212  2212
तू मुस्करा के देख ले
दिल से लगा के देख ले

झुकना नहीं मंजूर अब
कोई झुका के देख ले

है नाम तेरे जिन्दगी
बस आजमा के देख ले

ये खेल है दिलकस बहुत
बाजी लगा के देख ले

बुझते मुहब्बत के चिराग
अब तो जला के देख ले

कोई नहीं हमसा यहाँ 
नजरें घुमा के देख ले

मौलिक व अप्रकाशित
उमेश कटारा

Views: 774

Comment

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Comment by Dr. Vijai Shanker on April 5, 2015 at 2:17am
वाह, बहुत ही उम्दा ग़ज़ल। बधाई।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 5, 2015 at 1:11am

आदरणीय उमेश भाई जी छोटी बह्र में बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है. शेर दर शेर दाद कुबूल फरमाएं 

Comment by umesh katara on April 4, 2015 at 6:43pm

आदरणीय  डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तवजी शुक्रिया

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 4, 2015 at 5:49pm

आ० कटारा जी

छोट्टी बहर में क्या अच्छा कहा . वाह .

Comment by umesh katara on April 4, 2015 at 2:08pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी जी शुक्रिया

Comment by umesh katara on April 4, 2015 at 2:08pm

आदरणीय Nirmal Nadeem जी शुक्रिया

Comment by Nirmal Nadeem on April 4, 2015 at 12:28pm

KYA BAAT HAI WAAAAH WAAH BAHUT KHOOOB

BADHAI


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 4, 2015 at 12:16pm

आदरनीय उमेश भाई , खूब सूरत ग़ज़ल के उम्दा अश आर के लिये दिली मुबारकबाद कुबूल करें ॥

कृपया ध्यान दे...

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