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राहत कार्य (लघुकथा)

"सर, कुछ देर पहले उत्तर भारत में बड़ा भूकम्प आया है|"

"ओह, तुरंत कार्यवाही करो| संस्था के बीस बैनर और बनवा दो, पिछले भूकम्प वाले पत्र दिनांक और स्थान बदल कर सभी दानदाताओं को भिजवा दो| मैं भूकम्प प्रताड़ित क्षेत्र में चला जाता हूँ, गाड़ी तैयार करवा देना और राहत सामग्री के साथ उसमें दस-पन्द्रह खाली बैग रखना मत भूलना|"

(मौलिक और अप्रकाशित)

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Comment by vijay nikore on April 28, 2015 at 4:06pm

सुन्दर कघुकथा के लिए बधाई।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on April 28, 2015 at 3:50pm

'सर' जिनके लिए दिखावा कर चर्चा में आने का एक सुनहरा अवसर मात्र हो आपातकाल ..   ऐसे सर लोगों के ज़रिये होते राहत कार्यों के ज़मीनी सच पर सटीक प्रस्तुति हुई है

प्रस्तुति पर बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 28, 2015 at 12:28pm

आ. चन्द्रेश भाई , यही तो राहत कार्य की असलीयत है , हमारे यहाँ ! अच्छी लघु कथा कही आपने ! बधाई आपको ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 27, 2015 at 11:53pm

मनुष्य का शोषण कोई और नहीं समृद्ध तबके के मनुष्य ही करते हैं, छोटी मछलियों के विरुद्ध बड़ी मछलियों की तरह. 

सामयिक लघुकथा के लिए धन्यवाद..

शुभेच्छाएँ..

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 27, 2015 at 8:13pm

धन्य हो सरकारी सक्रियता.  सुन्दर प्रस्तुति .

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 27, 2015 at 6:10pm
सरकारी कार्यशैली का वर्णन।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 27, 2015 at 3:29pm
सुन्दर लघुकथा पर हार्दिक बधाई आदरणीय चंद्रेश जी
Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on April 27, 2015 at 12:22pm

सही समय का सदुपयोग. बहुत खूब ,आदरणीय चंद्रेश भाई जी

कृपया ध्यान दे...

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