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"जीजी, सुमित अभी तक घर नहीं आया है?"
"अरे, घुमने दो ना बेटे को। कौन सा उसकी इज्जत लुटने का खतरा है जो उसकी इतनी निगरानी रखेंगे।"
सुबह खबर थी कि सुमित गाँव की ही लड़की को लेकर भाग गया है।
"अरे!! अरे!!! हमको पकड़कर कहाँ ले जा रहे हो। हमने आखिर किया क्या है?"
"इन सभी औरतों को बिना कपड़ों के पूरे गाँव में घुमाओ। इज्जत केवल हमारी ही नहीं लुटेगी।"

मौलिक और अप्रकाशित

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Comment by VIRENDER VEER MEHTA on May 23, 2015 at 12:16pm

आदरणीय विनोद भाई बहुत ही लाजवाब रचना! 

 कथा का अंत कुछ अधिक कठोर.,... बरहाल सादर बधाई स्वीकार करे

Comment by Shubhranshu Pandey on May 22, 2015 at 9:14pm

आदरणीय विनोद जी, 

सुन्दर भाव की कथा है. 

सादर.

Comment by Shyam Narain Verma on May 22, 2015 at 11:27am

सुन्दर लघुकथा के लिये आपको बधाई ॥

सादर

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on May 21, 2015 at 9:02pm

लडको को आजादी देना  सचमुच खतरनाक है पर समाज इसके प्रति गंभीर नहीं है, सादर .

कृपया ध्यान दे...

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