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गज़ल - फिल बदीह --- वो सुनते नहीं कुछ , पुकारा बहुत है ( गिरिराज भंडारी )

122    122   122   122

जो कहते थे उनको इशारा बहुत है

वो सुनते नहीं कुछ , पुकारा बहुत है

 

ऐ तन्हाई आ मेरी जानिब चली आ

कि यादों को तेरा सहारा बहुत है

 

तबीयत से इक फूँक भारो तो यारों

जलाने को दुनिया, शरारा बहुत है

 

ये मजहब का ठेका हटा लो यहाँ से 

सुकूँ के लिये भाई चारा बहुत है

 

फलक बोस इमारत उन्हें हो मुबारक    --- गगन चुम्बी 

मुझे टूटी छ्त का सहारा बहुत है

 

ऐ साक़ी सुबू तू पिला दे किसी को

मुझे जाम आँखो का प्यारा बहुत है

 

तेरा शुक्रिया ग़म हमेशा कहूंगा 

तपा के , रुला के , निखारा बहुत है 

 

मुझे और खुशियाँ न देना ख़ुदाया

मुझे एक तेरा नज़ारा बहुत है

**********************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 5, 2015 at 8:43am

आदरणीय सौरभ भाई , आपके दिये ,  दिल से दाद ,  ने प्रसन्न क दिया , आपका बहुत शुक्रिया सराहना के लिये ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 5, 2015 at 8:41am

आदरणीय मिथिलेश भाई , हौसला अफज़ाई का बेहद शुक्रिया ॥


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 4, 2015 at 10:55pm

वाहवा.. वाहवा .. दिल से दाद कुबूल कीजये आदरणीय


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 25, 2015 at 3:22am

आदरणीय गिरिराज सर, 

आपकी फिल बदीह ग़ज़ल का कमाल देख रहा हूँ 

चकित हूँ आपकी ग़ज़ल पढ़कर 

आपकी रगों में लहू की जगह पर अब बह्रें दौड़ने लगी है 

WBC/RBC की जगह मुफाईलुन फाइलातुन ने ले लिया है 

नमन आपको 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 17, 2015 at 5:29pm

आदानीय आशुतोष भाई , सराहना के लिये आपका बहुत शुक्रिया । प्रोफाइल फोटो मेरा छोटा बेटा फोटो शाप मे ख्द बनाया है , इस्लिये पुराना बदलना पड़ा भाई , फरमाइश थी ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 17, 2015 at 5:26pm

आदरनीय विजय भाई , हौसला अफज़ाई का बेहद शुक्रिया ॥

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 17, 2015 at 11:24am

आदरणीय गिरिराज भाईसाब बहुत ही उम्दा ग़ज़ल हुई है ..प्रोफाइल फोटो के परिवर्तन ने मुझे चौंका दिया ..इस शानदार रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर 

Comment by Dr. Vijai Shanker on June 17, 2015 at 11:01am

तेरा शुक्रिया ग़म हमेशा कहूंगा
तपा के , रुला के , निखारा बहुत है
बहुत ही सुन्दर, बधाई, आदरणीय गिरिराज भंडारी जी, सादर।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 17, 2015 at 9:06am

आ. राहुल भाई , आपकी नज़रों का शुक्रिया  आपने सही याद दिलाया , इंगित शे र मे रदीफ ही गलत है , उस शे र को मै वापस ले रहा हूँ । सराहना के लिये आपका हार्दिक आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 17, 2015 at 9:04am

आदरणीय बड़े भाई विजय जी , आपकी उपस्थिति आनंद दायक है , सराहना के लिये आपका आभार ॥

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