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तरही गज़ल - ( फिल बदीह मे दिये मिसरे पर )तुम्हारे हाथ में ख़ंजर दिखाई देता है ( गिरिराज़ भंडारी )

1212    1122    1212   22 /112

फ़लक पे जो मुझे अक्सर दिखाई देता है

वो आम लोगों में तनकर दिखाई देता है

 

अभी हैं बदलियाँ चारों तरफ से घेरी हुईं  

तभी तो चाँद भी बदतर दिखाई देता है

 

जो तोप ले के चले साथ अपनें , वो हमको

कहें हैं हाथ में ख़ंजर दिखाई देता है

 

निजाम के कहीं साजिश का मारा वो भी न हो

जो रात दिन अभी घर पर दिखाई देता है

 

पलट न दें कहीं आकाश ये सताये हुये  

हरेक हाथ में पत्थर दिखाई देता है

वो छाँव बरगदी में खूब खेलते बच्चे

कहाँ , कहीं पे ये मंज़र दिखाई देता है

बहुत क़रीब से देखो न मेरे दागों को

रहेगा इंच वो गज भर दिखाई देता है

**********************************

मौलिक एवँ अप्रकाशित

 

 

 

 

 

 

 

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 8, 2015 at 9:47am

हा हा हा ....... अभी सुधारता हूँ आदरणीय सौरभ भाई  , ऊपर बहर लिखने गलती हो गई है । ध्यान दिलाने का शुक्रिया । गज़ल पर फिर आइयेगा  ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 8, 2015 at 5:29am

आदरणीय मिथिलेश भाई  , हौसला अफज़ाई का बेहद शुक्रिया ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 7, 2015 at 11:51pm

आदरणीय गिरिराज भाईजी, मैं तो मिसरों के वज़न में ही फंस गया.

ये क्या हाल बना रखा है ? कुछ ’करते’ क्यों नहीं ? .. :-))))
 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 28, 2015 at 3:52am

आदरणीय गिरिराज सर  बेहतरीन फिल बदीह ग़ज़ल हुई है शेर दर शेर दाद कुबूल फरमाएं 

बहुत क़रीब से देखो न मेरे दागों को

रहेगा इंच वो गज भर दिखाई देता है........ कमाल बेमिसाल 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 25, 2015 at 11:24am

आदरणीय हरि प्रकाश भाई , गज़ल की सराहना के लिये आपका आभार ।

Comment by Hari Prakash Dubey on June 24, 2015 at 5:50pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी सर  शानदार  ग़ज़ल है , हार्दिक बधाई   !  सादर  

निजाम के कहीं साजिश का मारा वो भी न हो

जो रात दिन अभी घर पर दिखाई देता है.......बहुत खूब

 पलट न दें कहीं आकाश ये सताये हुये  

हरेक हाथ में पत्थर दिखाई देता है....शानदार


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 24, 2015 at 4:45pm

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , सराहना के लिये आपका दिली शुक्रिया ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 24, 2015 at 4:44pm

आदरणीय मुकेश भाई , उत्साह वर्धन के लिये आपका हृदय से आभारी हूँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 24, 2015 at 4:43pm

आदरणीय श्री सुनील भाई , सराहना के लिये आपका आभारी हूँ ।

आदरणीय , आपकी सलाह सही लग रही है , कुछ परिवर्तन करूङा ज़रूर । आपका आभार ।


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 24, 2015 at 4:41pm

आदरणीय विजय भाई , हौसला अफज़ाई का बहुत शुक्रिया ।

कृपया ध्यान दे...

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