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ग़ज़ल :मीआ़दे उल्फ़त देखिये

2212 2212 2212


मीआ़दे उल्फ़त देखिये पूरी हुई
इतनी सी तब तो बात अब उतनी हुई.

क्या इश्क़ में दुनिया से तू भी तंग है
क्या तंज़ तुझ पे भी मेरे जैसी हुई.

दौरे गुज़श्ता ने असर कुछ यूँ किया
टूटा हुआ मैं,तू भी है टूटी हुई.

पाया है जो मेयार तेरे इश्क़ ने
लो! ज़िन्दगी क्या! रूह भी तेरी हुई.

ऐ चाँद! मुझको खींच ले ख़ुद की तरफ़
देखूं कि छत पे होगी वो आई हुई.

उनसा खिला गमले में इक तो गुल, अरे!
ख़ुशबूू भी उसमें हू ब हू उनसी हुई.

श्री सुनील

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment

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Comment by shree suneel on July 22, 2015 at 1:00am
ग़ज़ल पे आपकी उपस्थिति हर्षित कर रही है आदरणीय सौरभ सर जी. सादर धन्यवाद.

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 16, 2015 at 8:25pm

इतनी सी तब तो बात अब उतनी हुई = इतनी सी तब थी बात, अब उतनी हुई.

बाकी अश’आर पर जैसी बहस हुई है वह आपकी ग़ज़ल की थाती है. हार्दिक शुभकामनाएँ आदरणीय.

Comment by shree suneel on July 9, 2015 at 1:07am
सराहना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय विजय निकोर सर जी.
Comment by vijay nikore on July 8, 2015 at 6:18pm

बहुत खूब, बहुत खूब ! बधाई।

Comment by shree suneel on July 8, 2015 at 6:01pm
आपको अशआर पसंद आए..जानकर खुशी हुई. सराहना के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीया नीरज शर्मा जी. सादर.
Comment by shree suneel on July 8, 2015 at 5:54pm
धन्यवाद आदरणीय गोपाल नारायण सर जी.
Comment by shree suneel on July 8, 2015 at 5:53pm
आदरणीय विनय कुमार सिंह जी, सराहना के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
Comment by Dr. (Mrs) Niraj Sharma on July 8, 2015 at 10:15am

बहुत खूबसूरत ग़ज़ल लिखी है आपने। बधाई श्री सुनील जी। 

पाया है जो मेयार तेरे इश्क़ ने
लो! ज़िन्दगी क्या! रूह भी तेरी हुई.

ऐ चाँद! मुझको खींच ले ख़ुद की तरफ़
देखूं कि छत पे होगी वो आई हुई.   वाह क्या सुन्दर शेर हैं।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 8, 2015 at 10:12am

bahut behtareen

Comment by विनय कुमार on July 8, 2015 at 1:25am

// पाया है जो मेयार तेरे इश्क़ ने
लो! ज़िन्दगी क्या! रूह भी तेरी हुई // , वाह , वाह , बेहद उम्दा शेर , बधाई क़ुबूल करें आदरणीय..

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