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उकेर दिया है

समय की रेत पर

अपना हस्ताक्षर.

जानता हूँ

ख़त्म हो जाएगा

रेत के बिखराव से

मेरा वज़ूद.

संभावना यह भी

किसी संकुचन क्रियावश

घनीभूत हो रेत

प्रस्तर बन जाय .

तब देख पाओगे

खंडित होने तक

मेरा हस्ताक्षर.

कुच्छ भी तो नहीं है

अनंत.

(विजय प्रकाश)

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 892

Comment

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Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 14, 2015 at 7:16pm

बहुत बहुत आभार 

kanta roy JEE.

Comment by kanta roy on September 11, 2015 at 5:02pm

" कुछ भी तो नहीं है अनंत " ---- वाह , मन को कहीं दूर चिंतन मनन को ले जाता हुआ आपका ये हस्ताक्षर , जो रेत पर लिखे है ,जो मिटने के लिए ही उकेरे गये है । बहुत खूब हुई है ये रचना । एक - एक शब्द कई मीलों सी गहराई लिए । बधाई स्वीकार करें इस सुंदरतम रचना के लिए आदरणीय डा. विजय प्रकाश जी

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 11, 2015 at 9:43am

आ. सौरभ जी, मिथिलेशजी,प्रतिभा जी,राम सिरोमणि जी,शिज़्ज़ु शकूर जी,मोहन जी, प्राची सिंह जी, सुनील जी,
आप सबों का स्नेह-लेप लेखन की जीजीविषा को जीवित रखने का अमृत प्रदान करता है. आप सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 8, 2015 at 8:25pm

आ० डॉ० विजय प्रकाश शर्मा जी 

समय के आईने में आकृतियाँ के बहुत प्रभावी बिम्ब बनना... पर सब कुछ तो क्षणभंगुर ही है. 

इसका भान रहे तो नाम..पद..प्रतिष्ठा..पाकर अहंकार में मन कभी न फँसे 

इस भावदशा के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं 

प्रभावी प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई

Comment by shree suneel on September 8, 2015 at 1:53am
गहन भाव को अभिव्यक्त करती इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई आपको आदरणीय. सादर.
Comment by मोहन बेगोवाल on September 6, 2015 at 10:20pm

  आदरनीय विजय परकाश जी, इस भाव भरी कविता के लिए बधाई कबुल करें 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 6, 2015 at 9:02pm
बहुत सुंदर कविता है आदरणीय डॉ विजय सर बहुत बहुत बधाई आपको
Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 6, 2015 at 4:36pm

इस रचना पर आपके अनुमोदन की प्राप्ति से प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है. आप सब आदरणीय मित्रों का हार्दिक आभार.

Comment by ram shiromani pathak on September 6, 2015 at 1:03pm
बहुत सुन्दर भाव आदरणीय बधाई आपको
Comment by pratibha pande on September 6, 2015 at 9:14am

बहुत उत्कृष्ट रचना ,हार्दिक बधाई आपको आदरणीय विजय प्रकाश जी 

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