For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उकेर दिया है

समय की रेत पर

अपना हस्ताक्षर.

जानता हूँ

ख़त्म हो जाएगा

रेत के बिखराव से

मेरा वज़ूद.

संभावना यह भी

किसी संकुचन क्रियावश

घनीभूत हो रेत

प्रस्तर बन जाय .

तब देख पाओगे

खंडित होने तक

मेरा हस्ताक्षर.

कुच्छ भी तो नहीं है

अनंत.

(विजय प्रकाश)

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 893

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 14, 2015 at 7:16pm

बहुत बहुत आभार 

kanta roy JEE.

Comment by kanta roy on September 11, 2015 at 5:02pm

" कुछ भी तो नहीं है अनंत " ---- वाह , मन को कहीं दूर चिंतन मनन को ले जाता हुआ आपका ये हस्ताक्षर , जो रेत पर लिखे है ,जो मिटने के लिए ही उकेरे गये है । बहुत खूब हुई है ये रचना । एक - एक शब्द कई मीलों सी गहराई लिए । बधाई स्वीकार करें इस सुंदरतम रचना के लिए आदरणीय डा. विजय प्रकाश जी

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 11, 2015 at 9:43am

आ. सौरभ जी, मिथिलेशजी,प्रतिभा जी,राम सिरोमणि जी,शिज़्ज़ु शकूर जी,मोहन जी, प्राची सिंह जी, सुनील जी,
आप सबों का स्नेह-लेप लेखन की जीजीविषा को जीवित रखने का अमृत प्रदान करता है. आप सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 8, 2015 at 8:25pm

आ० डॉ० विजय प्रकाश शर्मा जी 

समय के आईने में आकृतियाँ के बहुत प्रभावी बिम्ब बनना... पर सब कुछ तो क्षणभंगुर ही है. 

इसका भान रहे तो नाम..पद..प्रतिष्ठा..पाकर अहंकार में मन कभी न फँसे 

इस भावदशा के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं 

प्रभावी प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई

Comment by shree suneel on September 8, 2015 at 1:53am
गहन भाव को अभिव्यक्त करती इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई आपको आदरणीय. सादर.
Comment by मोहन बेगोवाल on September 6, 2015 at 10:20pm

  आदरनीय विजय परकाश जी, इस भाव भरी कविता के लिए बधाई कबुल करें 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 6, 2015 at 9:02pm
बहुत सुंदर कविता है आदरणीय डॉ विजय सर बहुत बहुत बधाई आपको
Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 6, 2015 at 4:36pm

इस रचना पर आपके अनुमोदन की प्राप्ति से प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है. आप सब आदरणीय मित्रों का हार्दिक आभार.

Comment by ram shiromani pathak on September 6, 2015 at 1:03pm
बहुत सुन्दर भाव आदरणीय बधाई आपको
Comment by pratibha pande on September 6, 2015 at 9:14am

बहुत उत्कृष्ट रचना ,हार्दिक बधाई आपको आदरणीय विजय प्रकाश जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
9 hours ago
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
16 hours ago
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेतुझे याद किया था हमने ... "क्या...तुम्हारे मन के द्वार…See More
17 hours ago
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Friday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Friday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Jul 20
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Jul 18
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service