For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

उकेर दिया है

समय की रेत पर

अपना हस्ताक्षर.

जानता हूँ

ख़त्म हो जाएगा

रेत के बिखराव से

मेरा वज़ूद.

संभावना यह भी

किसी संकुचन क्रियावश

घनीभूत हो रेत

प्रस्तर बन जाय .

तब देख पाओगे

खंडित होने तक

मेरा हस्ताक्षर.

कुच्छ भी तो नहीं है

अनंत.

(विजय प्रकाश)

मौलिक व अप्रकाशित

Views: 882

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 14, 2015 at 7:16pm

बहुत बहुत आभार 

kanta roy JEE.

Comment by kanta roy on September 11, 2015 at 5:02pm

" कुछ भी तो नहीं है अनंत " ---- वाह , मन को कहीं दूर चिंतन मनन को ले जाता हुआ आपका ये हस्ताक्षर , जो रेत पर लिखे है ,जो मिटने के लिए ही उकेरे गये है । बहुत खूब हुई है ये रचना । एक - एक शब्द कई मीलों सी गहराई लिए । बधाई स्वीकार करें इस सुंदरतम रचना के लिए आदरणीय डा. विजय प्रकाश जी

Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 11, 2015 at 9:43am

आ. सौरभ जी, मिथिलेशजी,प्रतिभा जी,राम सिरोमणि जी,शिज़्ज़ु शकूर जी,मोहन जी, प्राची सिंह जी, सुनील जी,
आप सबों का स्नेह-लेप लेखन की जीजीविषा को जीवित रखने का अमृत प्रदान करता है. आप सभी मित्रों का बहुत बहुत आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on September 8, 2015 at 8:25pm

आ० डॉ० विजय प्रकाश शर्मा जी 

समय के आईने में आकृतियाँ के बहुत प्रभावी बिम्ब बनना... पर सब कुछ तो क्षणभंगुर ही है. 

इसका भान रहे तो नाम..पद..प्रतिष्ठा..पाकर अहंकार में मन कभी न फँसे 

इस भावदशा के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं 

प्रभावी प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई

Comment by shree suneel on September 8, 2015 at 1:53am
गहन भाव को अभिव्यक्त करती इस सुन्दर रचना के लिए हार्दिक बधाई आपको आदरणीय. सादर.
Comment by मोहन बेगोवाल on September 6, 2015 at 10:20pm

  आदरनीय विजय परकाश जी, इस भाव भरी कविता के लिए बधाई कबुल करें 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on September 6, 2015 at 9:02pm
बहुत सुंदर कविता है आदरणीय डॉ विजय सर बहुत बहुत बधाई आपको
Comment by Dr.Vijay Prakash Sharma on September 6, 2015 at 4:36pm

इस रचना पर आपके अनुमोदन की प्राप्ति से प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है. आप सब आदरणीय मित्रों का हार्दिक आभार.

Comment by ram shiromani pathak on September 6, 2015 at 1:03pm
बहुत सुन्दर भाव आदरणीय बधाई आपको
Comment by pratibha pande on September 6, 2015 at 9:14am

बहुत उत्कृष्ट रचना ,हार्दिक बधाई आपको आदरणीय विजय प्रकाश जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
yesterday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Saturday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Friday
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
Apr 7
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Apr 6
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Apr 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service