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कुछ एक बातें …
कुछ  एक  बातें  ऐसी  हैं
कुछ   एक   बातें वैसी है
होठों पर  लज्जा   वाली
भीगी   रातों   जैसी   हैं
कुछ एक बातें …
हृदय के सागर पर लिखी
अमर प्रीत की बात  कोई
शब्द नीड़ में जागी  सोई
अलसायी  बातों जैसी  हैं
कुछ एक बातें …
मन के अम्बर  पर कोई
दीप प्रीत के जला  गया
मधुपलों की सिमटी सी
कुछ यादें मेघों जैसी  हैं
कुछ एक बातें …
इक शीत बूँद  अंगारों  पर
तृप्ति पूर्व  ही  झुलस गयी
हार जीत की नैनझील पर
सुधियों की  नावों जैसी हैं
कुछ एक बातें …


सुशील सरना
मौलिक एवमं अप्रकाशित

Views: 393

Comment

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Comment by Sushil Sarna on November 22, 2015 at 5:01pm

आदरणीय   सतविंदर कुमार  जी प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से शुक्रिया। 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on November 19, 2015 at 8:26pm
हृदय सागर पर लिखी
अमर प्रीत की बात कोई
शब्द नीड़ में जागी सोई
अलसायी बातों जैसी हैं
बहुत सुंदर।बधाई आदरणीय सर जी
Comment by Sushil Sarna on November 18, 2015 at 6:25pm

आदरणीय   Sheikh Shahzad Usmani  जी प्रस्तुति पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का दिल से शुक्रिया। 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 18, 2015 at 12:52pm
मन के उद्गार बखूबी चित्रित होकर गुंथे हुए हैं शब्दों की काव्य-माला में--
मन के अम्बर पर कोई
दीप प्रीत के जला गया
मधुपलों की सिमटी सी
कुछ यादें मेघों जैसी हैं
कुछ एक बातें …
इक शीत बूँद अंगारों पर
तृप्ति पूर्व ही झुलस गयी
हार जीत की नैनझील पर
सुधियों की नावों जैसी हैं
कुछ एक बातें …
---बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय सुशील सरना जी।

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