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जब तुम हंसती हो झरते हैं,

जब

तुम हंसती हो
झरते हैं,
दशों दिशाओं से
इंद्रधनुषी झरने
हज़ार - हज़ार तरीके से
नियाग्रा फाल बरसता हो जैसे
तब,
सूखी चट्टानों सा
मेरा वज़ूद
तब्दील हो जाता है
एक हरी भरी घाटी में
जिसमे तुम्हारी
हंसी प्रतिध्वनित होती है
और मै,
सराबोर हो जाता हूँ
रूहानी नाद से
जैसे कोई योगी नहा लेता है
ध्यान में उतर के
अनाहत नाद की
मंदाकनी में

मुकेश इलाहाबादी ----

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 723

Comment

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Comment by MUKESH SRIVASTAVA on December 28, 2015 at 3:17pm

sabhee mitron ka bahut bahut aabhaar post pasandgee ke liye

Comment by vijay nikore on December 16, 2015 at 3:22pm

बहुत ही दिलकश रचना है। आनन्द आया। हार्दिक बधाई, आदरणीय मुकेश जी।

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on December 7, 2015 at 3:08pm

shurkiaa Mithilesh jee is sarahna ke liye

Comment by shree suneel on December 5, 2015 at 8:52pm
इस सुन्दर भावपूर्ण रचना के लिए आपको हार्दिक बधाई आदरणीय मुकेश श्रीवास्तव जी. सादर

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 3, 2015 at 10:26pm

आदरणीय मुकेश जी, सुन्दर भावाभिव्यक्ति पर हार्दिक बधाई 

Comment by Sushil Sarna on December 1, 2015 at 7:57pm

और मै,
सराबोर हो जाता हूँ
रूहानी नाद से
जैसे कोई योगी नहा लेता है
ध्यान में उतर के
अनाहत नाद की
मंदाकनी में

वाह क्या बात है आदरणीय भावनाओं से लबरेज़ से सुंदर प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by MUKESH SRIVASTAVA on December 1, 2015 at 9:48am

 bahut bahut aabhar mitra Sameer Kabber jee, Digvijay ji & shyamnarayan Verma jee

Comment by Samar kabeer on November 30, 2015 at 10:51pm
जनाब मुकेश श्रीवास्तव जी,आदाब,आपकी कविता सुनी,बहुत ही सुन्दर कविता है,अपने ख़यालात को अल्फ़ाज़ की माला में पिरोकर बहुत ही अच्छे ढंग से पेश किया है,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।
Comment by DIGVIJAY on November 30, 2015 at 9:32pm

बहुत ही सुन्दर माननीय सदस्य महोदय पढ़ कर अदभुत आनंद मिला । हार्दिक बधाईयाँ आपको ।

Comment by Shyam Narain Verma on November 30, 2015 at 5:16pm
बहुत ही सुंदर , हार्दिक बधाई

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