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मुझे सच को कभी भी झूठ बतलाना नहीं आता - बैजनाथ शर्मा 'मिंटू'

अरकान -1222  1222  1222   1222

मुझे सच को कभी भी झूठ बतलाना नहीं आता|

तभी तो मेरे घर भी यार नज़राना नही आता|

 

अगर तुम प्यार से कह दो लुटा दूँ जान भी अपनी,

मगर परछाईयों से मुझको टकराना नहीं आता|

 

तड़पकर भूख से मरना मुझे हर पल गवारा है,

मगर आगे किसी के हाथ फैलाना नहीं अता|

 

तू कर दे सर कलम मेरा मगर है बेबसी मेरी,

मुझे दिन को कभी भी रात बतलाना नहीं आता|

 

अगर है शौक पीने का तो ख़ुद जाना तू मयखाने,

किसी के घर तलक चलकर ये मयखाना नही आता|

 

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 897

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Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on December 12, 2015 at 12:19am

आदरणीय सतविंदर जी .........बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on December 12, 2015 at 12:18am

आदरणीय सुनील जी ................बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on December 11, 2015 at 10:32pm

आदरणीया कांता जी .... बहुत बहुत शुक्रिया 

Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 9, 2015 at 9:23pm
बहुत ख़ूब।बधाई आदरणीय
Comment by shree suneel on December 9, 2015 at 9:07pm
आदरणीय बैजनाथ शर्मा जी, इस ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए दाद कुबूल करें. सादर.
Comment by kanta roy on December 4, 2015 at 7:13pm

ये नज़राने की बहुत बड़ी बात कह दी है आपने बातों ही बातों में आदरणीय बैजनाथ शर्मा 'मिंटू' जी।  बहुत खूब बात बनी है आपकी इस प्रस्तुति में।  बधाई आपको।  

Comment by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on December 4, 2015 at 12:47pm

आदरणीय जयनित मेहता साहेब,शुशील साहेब,समर कबीर साहेब,  मिथलेश वामनकर साहेब, लक्ष्मण धामी साहेब........हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया|

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 4, 2015 at 11:18am

मुझे सच को कभी भी झूठ बतलाना नहीं आता|

तभी तो मेरे घर भी यार नज़राना नही आता

अगर है शौक पीने का तो ख़ुद जाना तू मयखाने,

किसी के घर तलक चलकर ये मयखाना नही आता

आ0 बैजनाथ जी, बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल से हुई है हार्दिक बधाई l


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on December 3, 2015 at 11:03pm

आदरणीय बैजनाथ शर्मा जी, बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल से हुई है,शेर-दर-शेर दाद और मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं. सादर 

Comment by Samar kabeer on December 3, 2015 at 10:55pm
जनाब बैजनाथ शर्मा 'मिंटू' जी,आदाब,बहुत ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल से नवाज़ा है आपने मंच को,सुनकर दिल बाग़ बाग़ हो गया,शैर दर शैर दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।

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