For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पलट गई बाज़ी (लघुकथा)

इलेक्शन के ऐलान के बाद राजनीती का बाज़ार गर्म होने लगा,गाँव में हर पार्टी अपने अपने पर तोलने लगी ।

सभी तरफ  वोटर को लुभाने व उनका धर्म ज़ात व कीमत लगाने की तैयारी चल रही थी।

उस दिन मास्टर बजार में खड़ा कह रहा था “अब तो पहले जैसी राजनीती  नहीं रही” ।

“अब तो साये की तरह साथ रहने वाले पार्टी वर्करों पर भी कोई यकीन नहीं रहा”

पास खड़े आदमी ने कहा “ऐसा क्यूँ”, तुम देखते नहीं रेलियों में भीड़ जितनी  होती है, भीड़ को वोट में तब्दील करना एक टेढ़ी खीर बन गया है” । महिंद्र ने कहा ।

“अब तो जीत होगी या हार, ये पता लगाना भी बहुत मुश्कल हो गया है” पास खड़े महिंद्र ने मास्टर को कहा।   

महिंद्र को याद है,जब शुरू शुरू में इलेक्शन होती थी तो लोग हमें वैसे ही वोट डाल देते थे ।

एक बार तो रातो रात सब कुछ बदल गया, जब वोटें तो दुसरे ग्रुप ने बनाई, और निकली हमारे डब्बे में ।

“मगर अब तो वो दबा व प्यार भी काम नहीं आता” मास्टर जी ।

 “अब तो मुंह मांगे दाम देने पड़ते हैं” महिंद्र ने बात को आगे बड़ाते हुए कहा  ।

“फिर भी वोट किस तरफ डाल दें,कोई कुछ नहीं कहा जा सकता” मास्टर ने कहा । 

“कहते हैं अब लोगों को खास करके बस्ती वालों को  वोट की कीमत समझ आने लगी है” ।  

इसी को ध्यान में रखते हुए महिंद्र ने एक दिन पहले सभी बस्ती वालों  के लिए हवेली में खास पार्टी की तैयारी की जिमेवारी  उनके प्रधान को दी ,और साथ ही बस्ती  वालों के सभी वोटरों के इलेक्शन कार्ड पर नज़र रखने के लिए भी कह दिया ।

आज बहुत ही शांति से  इलेक्शन हुए,शाम को जब रिजल्ट आया तो सब हैरान हुए,महिंद्र की हवेली में सुनसान पसर गई, किसी को यकीन नहीं आया कि इस घर को भी कभी हार हो  सकती है, लोग पार्टी से ज्यादा, इनके बजुर्गो का ख्याल रख कर वोट देते थे ।

मगर इस बार तो, महिंद्र के सामने से प्रधान ने गुजरते हुए  कहा, सरदार जी, “इस बार तो हर तरफ बाज़ी पलट  गई है “और  नजरें चुराता हुआ अपने घर की तरफ चल पड़ा । महिंद्र देर तक वहाँ खड़ा कभी प्रधान और कभी बस्ती के बारे सोचता रहा।   

.

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 431

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by vijay nikore on December 16, 2015 at 2:31pm

अच्छी लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई, आदरणीय मोहन जी।

Comment by Nita Kasar on December 10, 2015 at 8:25pm
बाज़ी पलट गई है बाज़ी पलटने में वक़्त कहाँ लगता है चुनावी माहौल का एक रूप यह भी बधाई आद०मोहन बेगोवाल जी ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on December 9, 2015 at 9:32pm
सुंदर रचना के लिए बधाई आदरणीय मोहन सर जी।
Comment by Rahila on December 9, 2015 at 9:27pm
बहुत ही जीवंत चित्रण गांव में होने वाले चुनावों का । आदरणीय मोहन सर जी! बेहतरीन रचना । सादर नमन ।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on December 9, 2015 at 3:17pm
कुछ समय से परिलक्षित हो रहे चुनावी/राजनीति/मतदान परिणामों के मद्देनज़र समग्र रूप से बढ़िया चित्रण किया है कथोपकथन के साथ। हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीय मोहन बेगोवाल जी ।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"प्रिय अशोक कुमार जी,रचना को मान देने के लिए हार्दिक आभार। -- विजय"
23 hours ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सौरभ जी। आपने सही कहा.. मेरा यहाँ आना कठिन हो गया था।       …"
23 hours ago
vijay nikore commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"प्रिय सौरभ भाई, नमस्ते।आपका यह नवगीत अनोल्हा है। कई बार पढ़ा, निहित भावना को मन में गहरे उतारा।…"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
Friday
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
Friday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
Friday
Sushil Sarna posted blog posts
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service