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किस लिए वो हसीं बेवफा हो गयी (एक ग़ज़ल एक प्रयास ).....

किस लिए वो हसीं बेवफा हो गयी (एक ग़ज़ल एक प्रयास )

२१२ x ४
रदीफ़=हो गयी
काफ़िया=आ

किस लिए वो हसीं बेवफा हो गयी
जान हम से हमारी जुदा हो गयी !!१!!

अब गिला आसमां से नहीं है हमें
बे-असर अब हमारी दुआ हो गयी !!२!!

हाल अपना सुनायें किसे हम भला
लो मुहब्बत हमारी खता हो गयी !!३!!

रात भर करवटों में वो लिपटी रही
याद उनकी हमारी क़ज़ा हो गयी !!४!!


दिल भला या बुरा समझता है कहाँ
ये मुहब्बत सुल्ह की रज़ा हो गयी !!५!!

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Sushil Sarna on January 24, 2016 at 2:59pm

आदरणीय तेजवीर सिंह  जी  प्रयास पर आपकी स्नेहिल सराहना  का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on January 24, 2016 at 2:58pm

आदरणीय रवि शुक्ला जी  प्रयास पर आपके आशीर्वाद का हार्दिक आभार। 

Comment by Sushil Sarna on January 24, 2016 at 2:57pm

आदरणीय सतविंदर कुमार जी प्रयास की प्रशंसा का शुक्रिया। 

Comment by TEJ VEER SINGH on January 23, 2016 at 5:54pm

हार्दिक बधाई आदरणीय सुशील सरना जी !बेहतरीन गज़ल!

Comment by Ravi Shukla on January 22, 2016 at 9:44pm
आदरणीय सुशील जी आपको ग़ज़ल कआहट देख कर ख़ुशी हुई शायद हम आपकी पहली ग़ज़ल पढ़ रहें है । अच्छी ग़ज़ल हुई है बधाई स्वीकार करें ।
Comment by सतविन्द्र कुमार राणा on January 22, 2016 at 5:41pm
बेहतरीन!हार्दिक बधाई आदरणीय

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