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दोहा का रंग भोजपुरी के संग: संजीव वर्मा 'सलिल'

दोहा का रंग भोजपुरी के संग:


संजीव वर्मा 'सलिल'


सोना दहलs अगनि में, जैसे होल सुवर्ण.

भाव बिम्ब कल्पना छुअल, आखर भयल सुपर्ण..

*

सरस सरल जब-जब भयल, 'सलिल' भाव-अनुरक्ति.

तब-तब पाठकगण कहल, इहै काव्य अभिव्यक्ति..

*

पीर पिये अउ प्यार दे, इहै सृजन के रीत.

अंतर से अंतर भयल, दूर- कहल तब गीत..

*

निर्मल मन में रमत हे, सदा शारदा मात.

शब्द-शक्ति वरदान दे, वरदानी विख्यात..

*

मन ऐसन हहरल रहन, जइसन नदिया धार.

गले लगल दूरी मिटल, तोड़ल लाज पहार..

*

कुल्हि कहानी काल्ह के, गइल जवानी साँच.

प्रेम-पत्रिका बिसरि के, क्षेम-पत्रिका बाँच..

*

जतने जाला ज़िन्दगी, ओतने ही अभिमान.

तन संइथाला जेतने, मन होइल बलवान..

*

चोटिल नागिन के 'सलिल', ज़हरीली फुंकार.

बूढ बाघ घायल भयल, बच- लुक-छिप दे मार..

*

नेह-छोह राखब 'सलिल', धन-बल केकर मीत.

राउर मन से मन मिलल, साँस-साँस संगीत..

*

दिव्यनर्मदा.ब्लॉगस्पोट.कॉम

Tags: 'salil', -acharya, /samyik, angika, bhojpuree, bhojpuri, chhand, dilectics, doha, hindi

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 20, 2010 at 11:51am
जतने जाला ज़िन्दगी, ओतने ही अभिमान.
तन संइथाला जेतने, मन होइल बलवान..

निर्मल मन में रमत हे, सदा शारदा मात.
शब्द-शक्ति वरदान दे, वरदानी विख्यात..
बहुत ही सुंदर रचना है आचार्य जी, एक एक शब्द से भाव टपक रहे है, बहुत ही खूबसूरत और गहरे अर्थ युक्त रचना ,

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 18, 2010 at 4:45pm
आदरणीय आचार्य जी, यद्यपि भोजपुरी मेरी मादरी ज़ुबान नहीं है, लेकिन हूँ तो मैं माँ भारती का ही बेटा ! इसलिए आपके भावों को समझने में मुझे कतई कोई परेशानी नहीं हुई ! वैसे तो प्रत्येक दोहा अपने अन्दर बहुत ही सुंदर सा अर्थ समोए हुए है, लेकिन आपके निम्नलिखित तीन दोहे दिल की गहरायी तक उतर गए :
//सोना दहलs अगनि में, जैसे होल सुवर्ण.
भाव बिम्ब कल्पना छुअल, आखर भयल सुपर्ण..//

//सरस सरल जब-जब भयल, 'सलिल' भाव-अनुरक्ति.
तब-तब पाठकगण कहल, इहै काव्य अभिव्यक्ति..//

//निर्मल मन में रमत हे, सदा शारदा मात.
शब्द-शक्ति वरदान दे, वरदानी विख्यात..//


आपके इन तीन दोहों में निहित सन्देश वाकई बहुत गहरा है और हर सच्चे कवि के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण दिशा निर्देश भी है ! में इस सारगर्भित काव्य रचना के लिए आपको ह्रदय से साधुवाद देता हूँ !
Comment by Admin on June 17, 2010 at 5:18pm
बहुत निमन लिखले बानी आचार्य जी, राउर इ दोहा त हमनी के हिंदी साहित्य मे पढ़नी जा, आ अब भोजपुरी रूपांतरण , कमाल के राउर लेखनी चलल बा इ दोहा मे, बहुत बढ़िया लागल इ राउर पोस्ट, बहुत बहुत बधाई इ पोस्ट खातिर,
एगो अउर निहोरा बा आचार्य जी ओपन बुक्स ऑनलाइन पर भोजपुरी रचना लिखे खातिर एगो अलग से 'भोजपुरी साहित्य" ग्रुप बनावल बा , निहोरा बा की आगे रौवा भोजपुरी के रचना वोइजे पोस्ट करे के कृपा करी, सुविधा खातिर हम लिंक भी नीचे दे देत बानी,
http://www.openbooksonline.com/group/bhojpuri_sahitya

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