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दिनरात चिरागों सा जला अपने वतन में

बह्र:-221-1221-1221-122

रुतबा -ए-उजाला है मिया अपने वतन में।
अब चैन मुहब्बत ओ मजा अपने वतन में।

अनपढ़ सा अंधेरा है मिटा अपने वतन में।
जैसे कोई खलिहान सजा अपने वतन में।।

वो रोज मुझे याद है वो ख़ूनी नजारा।
जब जुल्म से इन्सान लड़ा अपने वतन में।।

मुश्किल से हवा देश में लौटी है अमन की।
मजहब की न अब आग लगा अपने वतन में।।

बस चैन मुहब्बत -ओ-दुआ फर्ज के खातिर।
दिन रात चिरागों को जला अपने वतन में।।

आमोद बिन्दौरी
मौलिक/अप्रकाशित

Views: 600

Comment

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Comment by amod shrivastav (bindouri) on September 7, 2016 at 1:32am
Shukriya aap sabhi ka margdrshan ke liyr nmn
Comment by Samar kabeer on April 18, 2016 at 11:10pm
जनाब आमोद जी,आदाब,बहुत उम्दा ग़ज़ल से नवाज़ा है आपने मंच को,दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फ़रमाऐं ।

"मुश्किल से हवा देश में लौटी है अमन की
मजहब की न अब आग लगा अपने वतन में"

ये शैर आपका बहुत उम्दा है लेकिन सही शब्द है "अम्न",'अमन' प्रचलन का शब्द है,बहतर यही होता है कि ग़ज़ल कहते वक़्त किसी भी शब्द को उसके सही रूप में ही बरता जाए ,ऊला मिसरा अगर इस तरह कर लें तो कैसा रहे ? :-

"मुश्किल से हवा अम्न की लौटी है यहाँ पर"

बाक़ी शुभ-शुभ ।
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on April 18, 2016 at 4:44pm
बधाई हो
Comment by Shyam Narain Verma on April 18, 2016 at 4:04pm
बहुत ही सुन्दर ,  हार्दिक बधाई आपको …………..
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 18, 2016 at 11:19am

आ0 भाई आमोद जी बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है हार्दिक बधाई l

Comment by amod shrivastav (bindouri) on April 18, 2016 at 7:31am
आ शुशील सर आ सुरेश कल्याण सर आप का तहेदिल से आभार नमन
Comment by Sushil Sarna on April 17, 2016 at 8:13pm

मुश्किल से हवा देश में लौटी है अमन की।
मजहब की न अब आग लगा अपने वतन में।।

बस चैन मुहब्बत -ओ-दुआ फर्ज के खातिर।
दिन रात चिरागों को जला अपने वतन में।।

बहुत खूब आदरणीय बिन्दौरी जी .... अमन और चमन के भावों से लबरेज़ इस दिलकश ग़ज़ल की प्रस्तुत्ति के लिए हार्दिक बधाई।

Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on April 15, 2016 at 8:13am
दिल को छू लिया आपकी वाणी ने
जितनी तारीफ की जाए उतनी ही कम है
बिन्दौरी साहब
Comment by सुरेश कुमार 'कल्याण' on April 15, 2016 at 8:11am
वाह बिन्दौरी साहब वाह अति उत्तम
बहुत सुन्दर

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