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लो ये खिलते गुलाब ले जाओ

बह्र:-2122-1212-22

क्या नही है जनाब ले जाओ।
लो ये खिलते गुलाब ले जाओ।।

अब नही मेरा वास्ता उससे।
याद-ए-दौर-ए-शबाब ले जाओ।।

मुझको चाहो तो छोड़ दो तन्हा।
ये न करना की ख्वाब ले जाओ।।

जो भी आगोश में तेरी गुजरे।
उन पलों का हिसाब ले जाओ।।

मेरी तक़दीर में अंधेरे हैं।
आप यह माहताब ले जाओ।

है अगर मुझको छोड़कर जाना।
जिंदगी की किताब ले जाओ।।

आमोद बिन्दौरीमैलिक /अप्रकाशित

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Comment

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Comment by रामबली गुप्ता on April 7, 2016 at 7:28pm
वाह आद.बिंदौरी जी शानदार गज़ल हुई है। बहुत बहुत मुबारकबाद
Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 6, 2016 at 3:25pm

मुझको चाहो तो छोड़ दो तन्हा।
ये न करना की ख्वाब ले जाओ।

शेर बहुत पसंद आये 

Comment by मनोज अहसास on April 6, 2016 at 1:44pm
बहुत खूब
Comment by amita tiwari on April 6, 2016 at 12:43am

खूब सुन्दर रचना ......हार्दिक बधाई

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 5, 2016 at 10:58am

बहुत सूंदर


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 4, 2016 at 10:27pm

वाह्ह  वाह  बहुत शानदार ग़ज़ल कही है आमोद जी ,दिल से दाद हाजिर है 

मेरी तक़दीर में अंधेरे हैं।
आप यह माहताब ले जाओ।

है अगर मुझको छोड़कर जाना।
जिंदगी की किताब ले जाओ।। ---ये दोनों शेर बहुत पसंद आये 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on April 4, 2016 at 4:12pm

आमोद जी ..इस ग़ज़ल का हर शेर पसंद आया ..इस रचना  के लिए हार्दिक बधाई सादर 

कृपया ध्यान दे...

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