For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शिकवा - डॉ उषा साहनी

कितनी बंदिशें ज़िन्दगी में,
कितनी रुकावटें,
दिल नाशाद
दिमाग में रंजिशें।
बेपरवाह होके जीना,
इक गुनाह
घुट घुट के जीना,
इक सज़ा
न यह सही है न यह ग़लत
तिसपर भी ज़िन्दगी के हैं उसूल
औ नियम ,...... अनगिनत।
चाहा तो बहुत था
सब रहे सलामत
पर कब, कैसे बिगड़ गया,
याद भी नहीं रह गया
अब ये आलम है कि..... क्या है ,
क्या नहीं ,
पड़ता कहीं कोई फ़र्क़ नहीं।

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 651

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Usha on May 27, 2016 at 8:01am

जीवन में  कैसे कैसे सत्य से सामना होता है ,कैसे समझौते करने पड़ते हैं और फिर भी जीवन है कि  चलता ही रहता है।  एक छोटा सा प्रयास है यह कविता।  आदरणीय प्रतिभा पांडेय जी , आपने अपनी उपस्थिति को इतने खूबसूरत शब्दों से सजाया है , मैं उपकृत  हूँ।  आपका ह्रदय से बहुत बहुत सादर धन्यवाद।

Comment by pratibha pande on May 26, 2016 at 6:44pm

छोटे से कथ्य में  आपने  गंभीर बातें  कह दी , कब ,क्या कैसे अनचाहा हो जाता है सच में पता नहीं पड़ता  और फिर आ जाती  है  'अब क्या फरक पड़ता है' वाली  मानसिकता ,,बधाई प्रेषित है इस रचना पर आपको आदरणीया   

Comment by Usha on May 26, 2016 at 8:13am


आदरणीय बशर भारतीय जी , रचना पर सकारात्मक विचार हेतु सादर धन्यवाद 

Comment by Usha on May 26, 2016 at 8:12am
आदरणीय समर कबीर सर , नमस्ते , प्रस्तुत रचना पर आपकी उपस्थिति एवं सराहना के लिए सादर धन्यवाद। इधर कुछ व्यस्तता के कारण लेखन प्रभावित रहा है , आपका उत्साहवर्धन अवश्य प्रेरित करेगा और आपका आशीर्वाद आगे भी म्मिलता रहेगा।  सादर 
 
  

 

Comment by बशर भारतीय on May 26, 2016 at 7:21am
मनोभावों का सुंदर चित्रण हुआ है बधाई आ. उषा जी
Comment by Samar kabeer on May 25, 2016 at 10:46pm
मोहतरमा डॉ.उषा साहनी साहिबा आदाब,पहली बार आपकी रचना से रु बी रु होने का मौक़ा मिला है ।
ज़िन्दगी के उतार चढाव पर बेहतरीन लेखन ग़ोर-ओ-फ़िक्र की दवात देता है, और यही अच्छे लेखन की पहचान होती है, बहुत अच्छा लिखा तापने,दिल से ढेरों दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।
Comment by Usha on May 25, 2016 at 9:58pm

आदरणीय कल्पना भट्ट जी, रचना को पसंद करने और प्रशंसा के लिए हृदय से सादर धन्यवाद।  

Comment by Usha on May 25, 2016 at 9:57pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर , रचना के सार्थक मूल्यांकन हेतु आपको सादर धन्यवाद।

Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on May 25, 2016 at 8:58pm

बहुत खूब | अच्छी रचना है आदरणीया | बधाई | 

Comment by Dr. Vijai Shanker on May 25, 2016 at 8:48pm
इस दार्शनिक प्रस्तुति के लिए बधाई , आदरणीय सुश्री डॉo उषा साहनी जी , वैसे थोड़ा बहुत समझौता तो जीवन में सभी करते हैं। सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
7 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Saturday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service