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गजल(रात जब मुझको मिली...)

2122 212 2212
रात यूँ रसने लगी मेरी गजल
राग बन बहने लगी मेरी गजल।1

रोशनी हूँ चाँद की सुन लो सनम!
कान में कहने लगी मेरी गजल।2

फिर चली पुरवा सुहानी मंद-सी
कँपकपा गहने लगी मेरी गजल।3

अधखुले-से केश लहराते गगन
पाश में कसने लगी मेरी गजल।4

गुम हुई सहमे रदीफों की हवा
काफिये ढ़लने लगी मेरी गजल।5

चौंधिआयी आँख तारक मल रहे
प्रेम-रस पगने लगी मेरी गजल।6

धड़कनें अब थामकर बैठा 'मनन'
साँस बन चलने लगी मेरी गजल।7
मौलिक व अप्रकाशित@मनन

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Comment

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Comment by Manan Kumar singh on June 4, 2016 at 10:02am
आभार आदरणीया कल्पना जी।
Comment by Manan Kumar singh on June 4, 2016 at 10:02am
आभार आदरणीया कल्पना जी।
Comment by Manan Kumar singh on June 4, 2016 at 10:01am
आभार आदरणीया,कांता जी।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on June 2, 2016 at 5:42pm

अच्छी ग़ज़ल हुई है आदरणीय बधाई स्वीकारें |

Comment by kanta roy on June 1, 2016 at 9:37pm
रोशनी हूँ चाँद की सुन लो सनम!
कान में कहने लगी मेरी गजल । ....वाह ! छोटी बहर में खूबसूरत गजल की गजल । बधाई प्रेषित है मनन कुमार जी
Comment by Nilesh Shevgaonkar on May 29, 2016 at 8:45pm

मतले में ईता दोष है ..मानिए तो ...नहीं तो सब बढ़िया है 

Comment by Manan Kumar singh on May 29, 2016 at 8:31pm
शुक्रिया व आदाब जनाब समर कबीर जी,हौसला आफजाई के लिए।
Comment by Samar kabeer on May 29, 2016 at 6:19pm
जनाब मनन कुमार जी आदाब,बढ़िया ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएँ ।
Comment by Manan Kumar singh on May 29, 2016 at 3:31pm
आभार ब्रिजेश जी आपका।
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on May 29, 2016 at 1:30pm

बहुत ही खूबसूरत....बधाई 

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