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    बहरे हज़ज मुसम्मन सालिम

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन

    1222 1222 1222 1222

            ग़ज़ल

सड़क पर बजबजाते चीखते नारों से क्या होगा

हवा में फुस्स हो जायें जो, गुब्बारों से क्या होगा ?

 

लडाई है बहुत बाकी बहुत कुछ कर गुजरना है

नही है हौसला दिल में तो नक्कारों से क्या होगा ?

 

जिन्हें हमने अता की है,  हकूमत देश की यारों

उन्ही में बदगुमानी है तो उद्गारों से क्या होगा ?

 

पड़े है एक कोने में,  जिन्हें परचम उठाना है

चलो उनको जगाओ सिर्फ धिक्कारों से क्या होगा?

 

हमें मिलकर उगानी है,  जवानों की नयी फसलें

पुराने बुझ चुके बदहाल मक्कारों से क्या होगा ?

 

करो कुछ तो गजब ऐसा कि जज्बा हो नया पैदा

थिरकते पाँव की पायल की झंकारों से क्या होगा ?

 

अगर होना है अपने आप होगा आँख का जादू

यहाँ ‘गोपाल’ केवल मन्त्र अभिचारों से क्या होगा ?

(मौलिक  व् अप्रकाशित )

 

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 19, 2016 at 9:53pm

आ= श्याम नारायण वर्मा जी -बहुत आभारी हूँ आपका , सादर

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 19, 2016 at 9:52pm

आशुतोष जी . बहुत शुक्रिया .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 19, 2016 at 9:51pm

महर्षि त्रिपाठी जी , बहुत आभारी हूँ .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 19, 2016 at 9:50pm

अनुज भंडारी जी , आपके समर्थन से बड़ा सुकून मिला . सादर .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 19, 2016 at 9:49pm

विजय सर , आप सदैव मुझे उर्जस्वित करते हैं . सादर

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 19, 2016 at 9:49pm

तस्दीक भाई  बहुत बहुत आभार .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 19, 2016 at 9:48pm

ब्रजेश कुमार जी , बहुत शुक्रिया .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 19, 2016 at 9:47pm

शेख  उस्मानी जी , आप हमेशा ही मेरा उत्साह बढ़ाते हैं . आपका आभार .

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 19, 2016 at 9:46pm

आ० सौरभ जी , गजल पर पहली बार आपका मुकम्मल आशीर्वाद पाकर बड़ी आश्वस्ति मिली. सादर .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 19, 2016 at 8:34pm

अरे कमाल कर डाला आपने, आदरणीय ! झकझोर-झकझोर डाले कि ! अभिधात्मकता को मारिये, ग़ज़ल पूरी तरह से अपनी सुनाती हुई है.. 

वाह वाह वाह !!

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