For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

२२१२ २२१२ २२

 

हमने यहीं पर ये चलन देखा

हर गैर में इक अपनापन देखा

 

देखी नुमाइश जिस्म की फिरभी

जूतों से नर का आकलन देखा

 

हर फूल ने खुश्बू गजब पायी

महका हुआ सारा  चमन देखा

 

लिक्खा मनाही था मगर हमने

हर फूल छूकर आदतन देखा

 

उस दम ठगे से रह गए हम यूँ  

फूलों को भँवरों में मगन देखा

 

होती है रुपियों से खनक कैसे

हमने भी रुक-रुक के वो फन देखा

 

रोशन चिरागों के तले देखे  

गलता हुआ बेबस बदन देखा

 

मौलिक/अप्रकाशित

Views: 781

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 4, 2016 at 11:35pm

आदरणीया राहिला जी सादर, गजल पर मेरा प्रयास आपको अच्छा लगा मेरा रचनाकर्म सफल हुआ. सादर आभार.

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 4, 2016 at 11:33pm

आदरणीय गिरिराज भंडारी साहब आपसे मिली सराहने से प्रस्तुति को संबल मिला. सादर आभार.

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 4, 2016 at 11:32pm

प्रस्तुत गजल पर उत्साहवर्धन के लिए दिल से आभार आदरनीय रवि शुक्ला साहब. सादर.

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 4, 2016 at 11:32pm

गजल को सराहने के लिए बहुत-बहुत आभार आदरणीय जयनित कुमार मेहता जी. सादर.

Comment by Rahila on July 4, 2016 at 3:25pm
"देखी नुमाइश जिस्म की फिरभी
जूतों से नर का आकलन देखा" क्या खूब अंदाज से ये शेर लिखा आदरणीय सर जी!बहुत बढ़िया ग़ज़ल कही ।बहुत बधाई सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on July 4, 2016 at 3:16pm

देखी नुमाइश जिस्म की फिरभी

जूतों से नर का आकलन देखा    -- क्या बात है , आ. अशोक भाई , मेरे दिल की बात कह दी आपने । गज़ल भी खूब कही है , हार्दिक बधाई आपको ।

Comment by Ravi Shukla on July 4, 2016 at 1:55pm

आदरणीय अशोक जी, अच्छी गजल कही आपने बधाइ स्‍चीकार करें । 

Comment by जयनित कुमार मेहता on July 3, 2016 at 9:46pm
आदरणीय अशोक जी, बहुत अच्छी लगी आपकी ग़ज़ल। खूब बधाइयां आपको।
Comment by Ashok Kumar Raktale on July 3, 2016 at 3:03pm

भाई शिज्जु 'शकूर' जी सादर, आप से तारीफ़ का संबल मिला. प्रस्तुति सफल हुई. सादर आभार.

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 3, 2016 at 3:02pm

आदरणीय महेंद्र कुमार जी सादर प्रस्तुत गजल पर उत्साहवर्धन के लिए बहुत-बहुत आभार. आप मतले की बात कर रहे हैं मगर भाई यहाँ तो सब अपने ही हैं. सादर.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
13 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
14 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
14 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
15 hours ago
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
15 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
16 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
16 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति व उत्ताहवर्धन के लिए हार्दिक आभार।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। क्रोध पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई। साथ ही भाई अशोक जी की बात…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service