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दो शब्द चित्र (गणेश जी बागी)

दो शब्द चित्र

1-

दरकिनार हुए...

अनुभव, योग्यता

कार्य-कुशलता,

कर्तव्य-परायणता,

मधुरता, चाल-चलन, चरित्र

ध्वस्त हुई....

न्याय प्रणाली

हावी हुई....

पैरवी और चापलूसी

आकलन का पैमाना बनी 

जाति

और

मुझे समीक्षा करनी पड़ी

स्वयं के

आरक्षण विरोधी होने पर.

2-

हर्ष व कष्ट मिश्रित

वो नौ माह

तत्पश्चात

बिटिया का आगमन

गलियारे के बाहर

परिजनों की आवाज

उफ्फ..

फिर बेटी !

अथाह वेदना....

प्रसव पीड़ा

कुछ भी न थी.

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by ASHISH KUMAAR TRIVEDI on August 11, 2016 at 10:46am

दो गंभीर मुद्दे। जाती के आधार पर योग्यता का मूल्यांकन सर्वथा अनुचित। फिर भी जाती के आधार आज भी प्रतिभा परखी जाती है। 

प्रसव पीड़ा

कुछ भी न थी.

यह पंक्ति सब कुछ बयान कराती है। 

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 11, 2016 at 1:49pm

आदरणीय बागी जी सादर नमस्कार, देश की दो गंभीर समस्याओं के बहुत सटीक शब्द चित्र खींचें हैं आपने. दोनों पर ही देश समाज को अपनी समझ बढाने एवं पुनर विचार की आवश्यकता है. सादर.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 11, 2016 at 9:39am

आत्म-मंथन के शब्द चित्र पूरे समाज को झकझोर रहे हैं...हार्दिक बधाई आदरणीय गनेश जी बागीजी.....सादर

Comment by TEJ VEER SINGH on July 10, 2016 at 9:35pm

हार्दिक बधाई आदरणीय गणेश  जी बागी जी! बहुत शानदार रचनायें!


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 10, 2016 at 3:02pm

आदरणीय समर साहब, काफ़ी व्यस्तता के मध्य कुछ भाव आ गए फलस्वरूप कविता स्वरुप ले सकी, आपको कविता पसंद आयी यह जानकार मन मुग्ध है, बहुत बहुत आभार.

Comment by Samar kabeer on July 10, 2016 at 12:39pm
जनाब "बाग़ी"जी आदाब,दोनों रचनाएँ दिल में उत्तर गईं,दिल से बधाई स्वीकार करें ।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on July 9, 2016 at 11:58am

आदरणीय डॉ विजय शंकर जी, रचना आपको अच्छी लगी लेखन कर्म सार्थक हुआ, बहुत बहुत आभार.

Comment by Dr. Vijai Shanker on July 8, 2016 at 8:03pm
पहचान-पत्र नहीं
जाति प्रमाण-पत्र
लोगों को पकड़ा दिया ,
पकड़े रहो , सम्भाले रहो ,
दिखाते रहो .........
जाति-व्यवस्था मिटाने के लिए।
दोनों रचनाएं बहुत ही सामयिक , सार्थक। दूसरी निशब्द कर देती है ,
ईश्वर जन्म नहीं रोकता ,
वे जुबान।
बधाई, आदरणीय गणेश जी "बागी" जी , सादर।

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